48 घंटे तक बनी रही गफलत पर आखिरकार डीएम ओएन सिंह की निष्ठा और सक्रियता भारी पड़ गई। यही वजह रही कि सरकार ने अपने ही फैसले को बदलते हुए उनका तबादला रद्द कर दिया। शनिवार की देर शाम उनके स्थानांतरण पर रोक का आदेश जारी कर दिया गया और इसी के साथ डीएम को जिले से हटाने के लिए पैरवी करने वाले एक विधायक के समर्थकों में चल रहा जश्न का माहौल भी फीका पड़ गया।
डीएम का तबादला रुकवाने में सूबे के दो प्रभावशाली मंत्रियों का बड़ा योगदान बताया जा रहा है। इनमें एक वहीं मंत्री हैं, जिन्होंने डीएम के कामकाज की तारीफ कर उन्हें जनवरी में जिले की कमान दिलाई थी। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक हाल ही में बगावत कर फिर से पार्टी से जुड़े एक विधायक ने सरकार के ही एक दूसरे प्रभावशाली मंत्री से सिफारिश कर जिला पंचायत चुनाव से चली आ रही टीस को मिटाने के लिए डीएम का तबादला करवाया था। मगर इसके बाद जब सीधे मुख्यमंत्री तक डीएम की वफादारी और सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र पहुंचा तो उन्होंने तबादले के आदेश को पलट दिया।
शुक्रवार की शाम को ही डीएम का तबादला रोके जाने के संकेत भी मिल गए थे। यही नहीं सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा आम हो गई थी। अगले दिन सुबह से ही डीएम की दिनचर्या ने इसपर मुहर भी लगा दी। देर शाम स्थानांतरण रोके जाने के आदेश के साथ ही तरह-तरह की कयासबाजी पर भी विराम लग गया।