आक्सीजन की कमी से बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई मौतों के मामले की जांच के लिए डीएम राजीव रौतेला ने चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को शनिवार की दोपहर 12 बजे तक जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। जांच कमेटी में एडीएम सिटी, एडी हेल्थ, सीएमओ, तथा सिटी मजिस्ट्रेट शामिल हैं।
मौत की सूचना पर मेडिकल कॉलेज पहुंचे डीएम ने कालेज के प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्र और अन्य डॉक्टरों से फीडबैक लिया। वार्ड का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि मेडिकल कॉलेज से मिली रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ सात लोगों की मौत हुई है वह भी आक्सीजन की कमी से नहीं बल्कि बीमारी से। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कबूल किया कि 10 से लेकर 11 अगस्त की शाम पांच बजे तक कुल 30 मरीजों की मौत हुई है। बाकी के 23 मरीजों की मौतें भी आक्सीजन की कमी से नहीं बीमारी से ही हुई हैं। इनमें 10 अगस्त को एनआईसीयू के 14, एईएस से तीन तथा नान एईएस के छह मरीज शामिल हैं। इसी तरह 11 अगस्त को एनआईसीयू के तीन, एईएस के दो तथा नॉन एईएस के दो मरीज शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद इन मरीजों के मौत की वजह स्पष्ट होगी।
डीएम ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से आक्सीजन की कमी की जानकारी दी गई थी जिसपर एसएसबी, संतकबीरनगर और फैजाबाद आदि जगहों से कॉलेज को आक्सीजन मुहैया कराया गया। मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट के मुताबिक 10 अगस्त की शाम साढ़े सात बजे लिक्विड आक्सीजन में प्रेशर लो होने पर रिजर्व 52 आक्सीजन सिलेंडर को लगाकर काम चलाया गया। इसी तरह मेसर्स आईजीएल फैजाबाद से 50 सिलेंडर मंगाए गए जो 11 अगस्त को दोपहर 1.30 बजे मेडिकल कालेज के वार्ड नंबर 100 में पहुंचे। तत्काल इन सिलेंडर को सेंट्रल पाइप लाइन आपरेटर द्वारा लगाया गया। 11 की ही सुबह 8.30 बजे मेसर्स आईजीएल फै जाबाद से फिर कुछ सिलेंडर मिले। इसी तरह दोपहर 1.30 बजे मेसर्स मोदी फार्मा से पहले 22 और फिर शाम 4.30 बजे 36 सिलेंडर मिले। आईजीएल फैजाबाद से रात 11 बजे तक 100 और सिलेंडर मेडिकल कॉलेज पहुंचने की उम्मीद है।
सुबह मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ से ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी का मामला सामने आया। इसके बाद एसएसबी और विभिन्न फर्मों से सिलेंडर का इंतजाम करा दिया गया। ऑक्सीजन की कमी को मौत की वजह बताए जाने की सूचना सिर्फ मीडिया से मिल रही है। डीएम या मुझे किसी तीमारदार की तरफ से भी शिकायत नहीं मिली है। मगर सच का पता लगाने के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा कि मौत की वजह बीमारी है या फिर ऑक्सीजन की कमी। 11 अगस्त की शाम पांच बजे तक सात और 10 अगस्त को 23 मौत होने की सूचना है।
- अनिल कुमार, कमिश्नर
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई मौतों के मामले की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय कमेटी में अपर आयुक्त प्रशासन, एडीएम सिटी, एडी हेल्थ, सीएमओ, तथा सिटी मजिस्ट्रेट शामिल हैं। कमेटी शनिवार की दोपहर 12 बजे तक जांच रिपोर्ट देगी। अभी तक के फीडबैक में सिर्फ सात लोगों की मौत की जानकारी मिली है, वह भी आक्सीजन की कमी से नहीं बल्कि बीमारी से। हां 10 से 11 अगस्त की शाम पांच बजे तक कुल 30 मरीजों की जान गई है।
-राजीव रौतेला, डीएम
इंदौर हादसे से सबक लेते तो कलंकित न होता गोरखपुर
इंदौर के एक अस्पताल में जून में ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने से 17 मरीजों की मौत की खबर ने पूरे देश की संवेदना झकझोर दी थी। इस हादसे से बीआरडी मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदार अगर सबक लेते तो गोरखपुर की माटी 36 घंटे में 30 मरीजों की मौतों से कलंकित न होती। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर खींचतान काफी दिनों से चल रही थी। इसे लेकर सप्लाई देने वाली फर्म पुष्पा सेल्स की ओर से कई बार मेडिकल कॉलेज प्रशासन को नोटिस भी भेजा गया था। हर बार सप्लाई ठप करने की चेतावनी दी जाती रही। इसके बाद भी फर्म का बकाया चुकाने को लेकर गंभीर प्रयास नहीं दिखे। नतीजा रहा कि सप्लाई ठप हो गई और गुरुवार को मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन का संकट खड़ा हो गया। आधी रात को ऑक्सीजन सप्लाई बंद हुई तो 50 के करीब मरीज बेहोशी की हालत में जा पहुंचे। यह हाल देखकर मौके पर तैनात डॉक्टरों के हाथ-पांव फूलने लगे। जिम्मेदारों ने ऑक्सीजन की व्यवस्था के लिए जोर आजमाइश शुरू कर दी, लेकिन इससे पहले मामले में बरती गई लापरवाही की कीमत 30 जिंदगियों को खोकर चुकानी पड़ी।