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आईसीयू का गेट बंद कर डॉक्टर छिपाते रहे करतूत

Sat, 12 Aug 2017 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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बच्चे का शव लेकर बिलखते घरवाले। - फोटो : Amar Ujala
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दवा और जांच बाहर से कराने के बाद ऑक्सीजन के बिना मासूमों की मौत हो गई। लापरवाह मेडिकल कॉलेज प्रशासन ऑक्सीजन खत्म होने के बाद भी इंतजाम करने के बजाय तीमारदारों को वार्डों से भगाकर हकीकत छिपाता रहा। ऑक्सीजन की कमी की वजह से तड़प रहे मासूम को देखने वाले तीमारदारों को बाहर कर गेट बंद कर दिया गया था। बिलखते तीमारदारों ने बताया कि दवा, जांच सब बाहर से करानी पड़ी और ऑक्सीजन तक की व्यवस्था मेडिकल कॉलेज में नहीं हो सकी। डॉक्टर इलाज की जगह कमीशन के चक्कर में बाहर भेज देते हैं।
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पड़रौना से आए मृत्युंजय ने बताया कि वार्ड में भर्ती बच्चे का ऑक्सीजन खत्म होने की जानकारी हुई। इसके बाद भी डॉक्टरों ने बाहर से दवा लाने को कह दिया। एक बार भी ऑक्सीजन के बारे में हमें नहीं बताया गया। लापरवाह डॉक्टरों की करतूत से मैं जान गया था कि बच्चा नहीं बचेगा, मगर कर भी क्या सकता था। बस्ती, राजनीपुर के दीपचंद के 11 महीने के बच्चे की भी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि यहां न डॉक्टर जिम्मेदार हैं और न कर्मचारी। जब ऑक्सीजन ही नहीं था तो भर्ती क्यों किया गया। कर रहे थे। पहले बता दिया गया होता तो मैं प्राइवेट अस्पताल चला जाता।   खोराबार क्षेत्र के नौआ आउल निवासी राधेश्याम सिंह अपनी पोती को लेकर आए थे। उनका कहना था कि दवा तो हम बाहर से ही खरीद रहे थे और अब ऑक्सीजन भी खत्म हो गया। देवरिया निवासी अमित सिंह की बेटी प्रतिज्ञा की भी मौत हो गई। उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को मौत का जिम्मेदार बताया और कहा कि डाक्टरों ने उनकी बेटी को मार डाला। बिना आक्सीजन के डॉक्टर इलाज करते रहे। उन्होंने रेफर भी नहीं किया। 
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अफसरों की लापरवाही ने ली जानें ऑक्सीजन सप्लाई में कमी की जानकारी मेडिकल कॉलेज प्रशासन और जिले के आला अफसरों को भी थी लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन और अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अनीता भटनागर जैन के साथ नौ अगस्त को ही मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की थी। इसके बावजूद ऑक्सीजन सप्लाई में दिक्कत की जानकारी सीएम तक नहीं पहुंच सकी। अब मामला गंभीर हुआ तो जिलास्तरीय अफसर मेडिकल कॉलेज भागे हैं। 
ऑक्सीजन सप्लाई का ठेका पुष्पा सेल्स के पास है। कंपनी ने ऑक्सीजन की सप्लाई की लेकिन लंबे समय से 69 लाख रुपये का भुगतान नहीं हो सका। नियमानुसार, दस लाख रुपये से ज्यादा की बकायेदारी नहीं रखी जानी है। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रशासन का रवैया लापरवाही भरा बना रहा। पुष्पा सेल्स के अधिकारी दीपांकर शर्मा ने बताया कि भुगतान की फाइल प्रिंसिपल के पास है। लंबे समय से ऑक्सीजन की व्यवस्था में सुधार की मांग की जा रही थी लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। दीपांकर ने बताया कि ऑक्सीजन देहरादून से मंगाया जाता है। 69 लाख रुपये की बकायेदारी के बाद ऑक्सीजन की आपूर्ति में दिक्कत आ रही थी। 
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