धनतेरस पर मंगलवार को बाजार बर्तनों की चमक से गुलजार रहेगा। जीएसटी लागू होने के बाद से बर्तनों के दाम बढ़े हैं, लेकिन त्योहार पर लोगों के उत्साह के आगे बढ़ी कीमतें बौनी साबित हो रही हैं। धनतेरस के पहले ही बर्तन की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही से रौनक बढ़ गई है। ऐसे में मंगलवार को व्यापारियों को बर्तनों के भरपूर बिक्री होने की उम्मीद है।
बक्शीपुर में फैंसी बर्तन स्टोर के प्रोपराइटर साद उल अजीज ने बताया कि जीएसटी के बाद बर्तन व्यवसाय पर काफी फर्क पड़ा। इधर धनतेरस की आहट से बर्तन बाजार में रौनक आई है। जीएसटी से बर्तनों के रेट बढ़े हैं लेकिन मांग भी बढ़ी है। देहात क्षेत्रों से भरपूर ऑर्डर मिले। पिछले वर्षों में जिन दुकानदारों को माल देते आए थे, उन्हें बर्तन भेज दिए। कई नए ऑर्डर अभी तक पूरा नहीं कर सके हैं। धनतेरस पर बर्तन बाजार काफी गर्म रहने की उम्मीद है।
चम्मच भी हुआ महंगा
जीएसटी लागू होने के बाद सामान्य बर्तनों पर लगने वाला पांच प्रतिशत टैक्स बढ़कर 12 से 18 फीसदी हो गया है। इसके चलते चम्मच भी सात प्रतिशत महंगे हो गए हैं। अन्य बर्तन भी 13 फीसदी महंगे हुए हैं।
इलेक्ट्रॉनिक बर्तन 23 फीसदी महंगे
इलेक्ट्रानिक कुकर, इंडक्शन चूल्हा आदि जैसे किचन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान पर भी पांच फीसदी टैक्स की जगह अब 28 प्रतिशत जीएसटी लागू हो चुकी है। साद उल अजीज बताते हैं कि इसका असर इनकी खरीददारी पर पड़ा है। ज्यादातर लोग स्टील के बर्तन खरीद रहे हैं।
चीनी मिट्टी के डिनर सेट से दूरी
धनतेरस पर पिछले साल खूब खरीदे गए चीनी मिट्टी के डिनर सेट से इस बार ग्राहक दूरी बनाए हुए हैं। इसके पीछे कारोबारी इनकी कीमतों में आए भारी उछाल को कारण बता रहे हैं। इन पर पहले पांच प्रतिशत टैक्स लगता था जो अब बढ़कर 28 प्रतिशत हो गया है।
तांबे-पीतल के पुराने बर्तनों की पूछ घटी
तांबा और पीतल के पुराने बर्तन बदलकर नए खरीदने की व्यवस्था पर इस बार ब्रेक लगा है। बाजार में पुराने से नए बर्तनों की अदला-बदली में काफी गिरावट आई है। तांबा और पीतल का स्क्रैप की खरीद पर 18 प्रतिशत टैक्स दुकानदारों को देना पड़ रहा है, जबकि नए पर सिर्फ 12 प्रतिशत टैक्स लागू है। इसलिए इस व्यापार में बर्तन करोबारियों को छह फीसदी नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके चलते इस बार कई व्यापारियों ने तांबे और पीतल के पुराने बर्तनों की अदला-बदली से इस बार परहेज किया है। पिछले वर्ष की तुलना मार्केट में इस बार सिर्फ 75 फीसदी पुराने बर्तन आए।
कीमतों पर ध्यान नहीं, जरूरत का ख्याल
वर्ष में एक त्यौहार एक बार ही आता है। इसलिए खरीददारी तो करनी ही है। मेरे किचन में जिस चीज की जरूरत है, उनकी खरीद करूंगी। कीमतों पर बहुत ध्यान नहीं होगा, जरूरत का ख्याल करूंगी।
- मधु जायसवाल, रेती चौक
धनतेरस पर खरीदारी के चार शुभ मुहूर्त
इस बार धनतेरस पर खरीदारी के लिए चार शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। ज्योतिषी इन मुहूर्तों पर ही खरीदारी की राय दे रहे हैं। दोपहर बाद तीन से साढ़े चार बजे तक राहुकाल के दौरान खरीदारी से परहेज की बात भी ज्योतिषी कह रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र बताते हैं कि पांच दिवसीय दीपोत्सव का पहला दिन धनतेरस के रूप में जाना जाता है। इसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान आरोग्य के देवता धनवंतरी हाथ में अमृत कलश लिए प्रकट हुए थे। शास्त्रीय दृष्टिकोण से यह दिन मृत्यु के देवता यम की पूजा के लिए जाना जाता है। धनतेरस की शाम को यम को दीपदान करने से का विधान है। इसे शास्त्रों में अकाल मृत्यु से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है। इसके साथ ही इस दिन धनाध्यक्ष भगवान कुबेर की पूजा का भी विधान है। इसलिए धनतेरस पर बर्तन और धातु के अन्य सामान खरीदने की मान्यता है। धनतेरस को व्यापारी वर्ष में सर्वाधिक बिक्री वाले दिन के तौर पर भी लेते हैं। इस बार सुबह 10:34 से दोपहर 12 बजे तक लाभ बेला, 12 से 1:25 बजे तक अमृत बेला, शाम 8:52 से 10:26 बजे तक लाभ बेला और 10:27 से 11:55 तक अमृत बेला में खरीदारी का सबसे शुभ मुहूर्त है। सुबह 9:08 से 10:34 और शाम 7:17 से 8:51 तक चर बेला में खरीदारी सामान्य फल देने वाली होगी।
खूब बिकेंगे बर्तन, आभूषण और ऑटोमोबाल
त्योहार पर बर्तन और धातु के सामान खरीदने की मान्यता होने के कारण धनतेरस पर बर्तन के साथ ही साथ आभूषण और ऑटोमोबाइल बाजार भी गर्म रहेगा। तमाम ग्राहकों ने आभूषण, बाइक और कार की एडवांस बुकिंग कराई है।
बाजार से खाली बर्तन न ले जाएं
धनतेरस पर खरीदे जाने वाले बर्तन में अन्न, मिष्ठान या धन डालकर घर ले जाना चाहिए। इस दिन सोना, चांदी, पीतल के बर्तन खरीदना काफी शुभ माना गया है। धनतेरस पर होने वाला अबूझ मुहूर्त इसे किसी भी व्यापार को शुरू करने के लिहाज से सर्वोत्तम दिन बनाता है। इसके साथ ही प्रॉपर्टी की खरीद के लिए भी यह दिन बेहद खास मान्यता रखता है।