बीएचयू के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 22 व 23 फरवरी को आयोजित दीक्षांत समारोह का डॉ. भव्या और अनमोल को बेसब्री से इंतजार था। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति को लेकर दोनों बेहद उत्साहित थे, लेकिन गगहा के पास हुई दुर्घटना ने डॉ. भव्या की तो जान ही ले ली, जबकि डॉ. अनमोल को गंभीर हाल में अस्पताल पहुंचा दिया।
बकौल अनमोल, डॉ. भव्या की बेहद इच्छा थी कि वह प्रधानमंत्री के हाथों प्रमाण पत्र ले। हम दोनों की योजना आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली में दाखिला लेने की थी, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। घायल अनमोल मंगेतर को अपनी आंखों के सामने दम तोड़ता देखकर टूट सा गया है।
अस्पताल पहुंचे अनमोल के माता-पिता
अनमोल के पिता नरेंद्र कुमार शर्मा पत्नी और परिवार के सदस्यों के साथ दोपहर बाद जिला अस्पताल पहुंचे। उनके पहुंचते ही अनमोल फफककर रो पड़ा। सामान्य होने पर उसने पिता से किसी निजी चिकित्सालय में ले जाने का अनुरोध किया।
एकलौती बेटी थी डॉ. भव्या
हादसे के बाद डॉ. भव्या की मां रेनू शुक्ला बेसुध हो गई हैं। एक हादसे ने उनके पति और बेटी को उनसे छीन लिया। हरिशंकर शुक्ला और रेनू अपनी इकलौती बेटी से बेहद प्यार करते थे। वे उसे आगे बढ़ाना चाहते थे। डॉ. भव्या भी उनकी उम्मीदों पर खरा उतर रही थी। एमबीबीएस पूरा कर लौट रही बेटी के स्वागत की तैयारियों में वह मंगलवार की शाम से ही जुटी थीं। देर रात हादसे की जब खबर आई तो उनके शुभचिंतकों ने उन्हें केवल इतना बताया कि उनके पति व बेटी का एक्सीडेंट हो गया है।
बुधवार की दोपहर तक उन्हें पति व बेटी की मौत की जानकारी नहीं दी गई थी। पति व बेटी के शवों की हालत ऐसी नहीं थी कि उन्हें घर लाया जा सके। पोस्टमार्टम हाउस से दोनों के शव सीधे राजघाट ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। हरि शंकर शुक्ला के बड़े भाई ने मुखाग्नि दी। रेनू शुक्ला को अब केवल भाइयों का ही सहारा रह गया है।