आईजी जेल के निर्देश पर गोरखपुर जेल में दो दिन से तलाशी चल रही थी। जेलर ने बंदियों के पास आपत्तिजनक सामान के साथ ही 129 मोबाइल बरामद किए थे। उन्होंने इसका विरोध करने वालों के साथ सख्ती भी दिखाई थी। इसे लेकर खुन्नस खाए बंदियों को बृहस्पतिवार को हंगामे का बहाना मिल गया। बवाल के दौरान वह जेलर को हटाने की मांग कर रहे थे।
11 और 12 अक्टूबर की रात में जेलर डॉ. आरके सिंह ने डिप्टी जेलर और बंदीरक्षकों के साथ सभी 16 बैरकों की सघन तलाशी कराई थी। इस दौरान 129 मोबाइल बरामद किए गए थे। तलाशी के दौरान जब कई बंदियों ने मोबाइल देने में आनाकानी की तो उनके साथ सख्ती भी की गई। कार्रवाई के बाद बंदी जेल अफसरों से खुन्नस खाए हुए थे। बृहस्पतिवार की सुबह सूर्यभान के मौत की खबर मिलने के बाद उन्हें बवाल करने का बहाना मिल गया। पेड़ और बैरक की छत पर चढ़े बंदी जेलर डॉ. आरके सिंह के साथ डिप्टी जेलर और बंदीरक्षकों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। डीएम और एसएसपी को भी उन्होंने यही बात बताते हुए खराब भोजन मिलने की जानकारी दी।
जेल के बाहर उड़ती रही अफवाह
जेल में बवाल के बीच बाहर तरह-तरह की अफवाहें उड़ रही थीं। बंदियों से मिलने आए उनके घरवालों के साथ ही सहयोगी पुलिस के गोली चलाने और कई लोगों के घायल होने की बात कर रहे थे। जेल विजिटर भी पार्टी नेताओं को बैरक में बंदियों पर अत्याचार करने की जानकारी दे रहे थे। दोपहर में बंधक बनाए गए बंदी रक्षकों की मौत की अफवाह उड़ते ही सनसनी फैल गई।