राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों का पीएफ न जमा करने पर गोरखपुर और गोंडा के सीएमओ के खिलाफ जमानती अरेस्ट वारंट जारी किया गया है। पीएफ निर्धारण की सुनवाई के दौरान उपस्थित न होने पर पीएफ कमिश्नर वीवीबी सिंह ने यह कार्रवाई की। उन्होंने एसएसपी गोरखपुर और एसपी गोंडा को भी पत्र लिखकर उन्हें गिरफ्तार कर 28 नवंबर तक उनकी कोर्ट में हाजिर कराने को कहा है।
एनएचएम कर्मचारियों का पीएफ न जमा करने पर गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालय के तहत आने वाले 12 जिलों के सीएमओ को पहले नोटिस भेजा गया था पर किसी ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद फिर 14 अक्टूबर को सभी सीएमओ को समन भेजा गया। कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम की धारा सात (ए) के तहत पीएफ का अंशदान तय करने के लिए 31 को पहली सुनवाई थी। इसके बाद सात नवंबर को इस मामले में दूसरी सुनवाई थी। इन दोनों तिथियों में 10 जिलों के सीएमओ या फिर उनके प्रतिनिधि मय दस्तावेज उपस्थित हुए मगर गोरखपुर और गोंडा के सीएमओ नहीं आए। उनकी तरफ से न तो कोई प्रतिनिधि ही आया और न कोई प्रार्थनापत्र ही।
दरअसल पहले एनएचएम के कर्मचारियों को पीएफ की सुविधा से अलग रखा गया था, मगर इस संबंध में जारी शासनादेश सिर्फ 31 मार्च 2015 तक के लिए ही लागू था। इसके बाद इसे बढ़ाया नहीं गया। पीएफ महकमे का कहना है कि ऐसे में इन जिलों पर एनएचएम कर्मियों की एक अप्रैल 2015 से देनदारी बाकी है।
इन जिलों की चल रही सुनवाई
गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, संतकबीरनगर, बस्ती, गोंडा, सिद्धार्थनगर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और बलिया।
पहले कर्मचारियों के पीएफ का अंशदान जमा न करने और फिर नोटिस व समन के बाद भी उपस्थित न होने पर गोरखपुर और गोंडा के सीएमओ पर कार्रवाई की गई है। सुनवाई के बाद एनएचएम कर्मियों के अंशदान की देनदारी तय की जाएगी। इसे जमा न करने पर संबंधित के बैंक खाते सीज कर बकाया निकालने की कार्रवाई की जाएगी।
- वीवीबी सिंह, पीएफ कमिश्नर
35 हजार संविदा कर्मियों को मिलेगा पीएफ का लाभ
क्षेत्रीय भविष्य निधि कार्यालय गोरखपुर की सख्ती का लाभ 12 जिलों के एनएचएम के 35 हजार से अधिक संविदा कर्मचारियों को मिलेगा। इनमें हजारों आशा वर्कर से लेकर संविदा पर तैनात डॉक्टर भी शामिल हैं। यहीं नहीं, जिम्मेदारों की लापरवाही का लाभ भी इन संविदा कर्मचारियों को मिलेगा। यानी एक अप्रैल 2015 से लेकर अभी तक कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों के पीएफ अंशदान का भुगतान जिला स्वास्थ्य समिति को ही करना पड़ेगा।
उधर, इस समिति की मुश्किलें यही नहीं खत्म होने वाली हैं। पीएफ के अंशदान की देनदारी तय होने और उसकी वसूली होने के बाद महकमा, समय से अंशदान न जमा करने पर कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम की धारा 14 (बी) के तहत जुर्माना निर्धारण की कार्रवाई करेगा। इसके साथ ही धारा सात (क्यू) के तहत ब्याज निर्धारण की कार्रवाई करेगा।
इन जिलों के एनएचएम संविदा कर्मचारियों के पीएफ का अंशदान जमा करने के लिए पीएफ महकमे की तरफ से जिला स्वास्थ्य समिति के सचिव सीएमओ ही नहीं बल्कि समिति के अध्यक्ष डीएम, एनएचएम के प्रदेश निदेशक और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को भी पत्र लिखा गया। छह अप्रैल 2016 से कार्रवाई का यह सिलसिला शुरू हुआ। 19 जुलाई 2016 को रिमाइंडर भेजा गया, फिर 29 अगस्त 2016 को दूसरा रिमाइंडर जारी हुआ। इसके बाद महकमे ने अलग-अलग जिलों को अंशदान की रकम जमा करने के लिए कोड भी जारी कर दिया पर किसी भी सीएमओ ने इसे गंभीरता से नहीं लिया तो बकाया निर्धारण के लिए 14 अक्टूबर को समन जारी कर 31 को पहली सुनवाई में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे।
सर्व शिक्षा और मनरेगा कर्मियों के लिए भी कवायद
एनएचएम के साथ ही पीएफ महकमे ने जोन के 12 जिलों के सर्व शिक्षा अभियान के तहत तैनात संविदा कर्मचारी और मनरेगा मजदूरों को भी पीएफ का लाभ दिलाने के लिए कवायद शुरू कर दी है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत 40 हजार संविदा कर्मचारियों के पीएफ अंशदान के लिए जहां बीएसए को नोटिस भेजा गया है वहीं इन जिलों के करीब 45 लाख मनरेगा मजदूरों के लिए सभी सीडीओ को नोटिस भेजा है।