सूचना पाकर डीएम और एसएसपी भी मंडलीय जेल पहंचे।
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जेल में बवाल करने वाले बंदियों को काबू में करने के प्रशासन के सभी उपाय फेल हो गए। अफसरों ने बल प्रयोग से उन्हें डराने का प्रयास किया। बात न बनने पर जेल के अंदर फोर्स भेज दी गई। ड्रोन से निगरानी करने के साथ ही माइक से एलान कर बात न मानने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई। इसके बावजूद बंदी शांत नहीं हुए। जेलर को गाली देने के साथ ही वे कार्रवाई होने पर ही हटने की जिद पर अड़े थे।
अफसरों ने शुरू में जेल के बवाल को हल्के में लिया। जेल में पहुंचते ही डीएम, एसएसपी ने एनाउंस करने के साथ ही बंदियों को अपने बैरक में जाने की चेतावनी दी, लेकिन वे बैरक की छत पर ईट-पत्थर के साथ खड़े हो गए। बाहर की स्थिति पर नजर रखने के लिए कुछ बंदी पेड़ पर चढ़ गए जो अपने साथियों को जेल के अंदर चल रही गतिविधियों की जानकारी दे रहे थे। एक घंटे की बातचीत का कोई परिणाम न निकलने पर पुलिस ने रबर बुलेट और आंसू गैस के गोले दागे। इसके बाद बंदियों ने मोर्चा बंदी कर पथराव शुरू कर दिया जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
बंदी फोर्स के बाहर जाने पर ही पीछे हटने को तैयार थे। रणनीति के तहत अफसरों ने फोर्स को जेल से बाहर निकाला लेकिन बंदी फिर भी नहीं माने। आंसू गैस और रबर की गोली खत्म होने के बाद अफसरों ने दोबारा बल प्रयोग करने के लिए फोर्स को पूरी तैयारी के साथ अंदर बुला लिया लेकिन शासन से हुई बातचीत के बाद अफसर शांत हो गए। जेल अधीक्षक के आश्वासन पर सभी लौट गए।
पोस्टमार्टम से साफ होगी स्थिति
वर्ष 2010 में हुई हत्या के मामले में सूर्यभान आरोपी था। 23 मार्च 2011 को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बृहस्पतिवार को कोर्ट में सूर्यभान की पेशी थी। घटना के बाद पैरोकार ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बीमारी के कारण मौत होने की जानकारी दी। एसएसपी रामलाल वर्मा ने बताया कि बीमारी के कारण सूर्यभान की मौत होने की बात सामने आई है, लेकिन पोस्टमार्टम के बाद स्थिति साफ हो जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस कार्रवाई करेगी।
काटी गई जेल की बिजली, नहीं हुई बंदियों की पेशी
बवाल के बाद मंडलीय कारागार में बंद कैदियों की कोर्ट में पेशी नहीं हुई। बृहस्पतिवार को 100 से अधिक बंदियों की कोर्ट में पेशी थी। दोपहर में कोर्ट में पहुंचे पैरोकार ने बवाल की जानकारी देते हुए बंदियों को अगली तारीख पर पेश करने की जानकारी कोर्ट मुहर्रिर को दी। जेल की स्थिति बिगड़ने के बाद वहां की बिजली भी काट दी गई। बंदियों से मिलने आए लोगों को लौटा दिया गया। सभी को सोमवार की सुबह आने को कहा गया।
जेल पहुंचे सपा जिलाध्यक्ष और विजिटर
गोरखपुर। मंडलीय कारागार में बवाल की सूचना के बाद जेल विजिटर हरिकेश यादव अपने समर्थकों के साथ पहुंच गए। बवाल के बीच ही ये लोग अंदर जाने की जिद करने लगे। हालात ठीक न होने की बात कह अफसरों ने हरिकेश को गेट पर ही रोक दिया। उन्होंने मामले की जानकारी फोन से जिलाध्यक्ष को दी। साथ ही ये भी बताया कि अंदर बंदियों पर अत्याचार हो रहा है। दोपहर दो बजे जिलाध्यक्ष मोहसिन खान भी जेल पहुंचे। अंदर जाने के लिए अधिकारियों से बातचीत की लेकिन अनुमति नहीं मिलने पर सभी लोग लौट गए।