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डॉक्टर के खाते से दस लाख की जालसाजी में तीन गिरफ्तार

Mon, 05 Nov 2018 12:17 AM IST
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
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गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजहर अली और उनके पिता के संयुक्त खाते से दस लाख रुपये की जालसाजी का पर्दाफाश पुलिस ने कर दिया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर 4.80 लाख रुपये बरामद कर लिए। घटना में शामिल दो अन्य जालसाजों की तलाश की जा रही है। इस मामले में बैंक कर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। उनकी भी जांच शुरू कर दी गई है।
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एसएसपी शलभ माथुर ने पुलिस लाइंस में प्रेस कांफ्रेंस कर घटना का पर्दाफाश किया। एसएसपी ने बताया कि डॉ. अजहर अली और उनके पिता डॉ. शौकत अली खान संयुक्त खाता एसबीआई की उर्दू बाजार शाखा में है। डॉ. शौकत ने वर्ष 2017 में एटीएम कार्ड के लिए आवेदन किया था। बैंक ने जरिए डाक उनका एटीएम कार्ड भेजा था।

डाकिये की गलती से एटीएम कार्ड उनकी जगह पड़ोसी मो. युसूफ खां मिल गया। एटीएम मिलने के बाद ही उसने डॉक्टर के खाते से रकम निकालने की योजना बना ली। उसके पहले युसूफ हत्या के एक मामले में जेल गया था। जेल में उसकी मुलाकात बशारतपुर, शाहपुर निवासी रवि सोलंकी से हुई। रवि के साथ मिलकर उसने धोखाधड़ी करने की तैयार कर ली। अमितेष और शमसुद्दीन के साथ मिलकर काम करना शुरू किया। करीब एक साल तक इंतजार करने के बाद खाते में 10 लाख रुपये आने के बाद खाते से रकम निकाल ली।
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पकड़े गए आरोपियों की पहचान तिवारीपुर के घासीकटरा निवासी मो. युसूफ खां, कोतवाली क्षेत्र के बेनीगंज निवासी शमसुद्दीन अहमद और कोतवाली, बस्ती के डाड़ीडीह निवासी अमितेष सिंह के रूप में हुई है। बशारतपुर, शाहपुर के रवि सोलंकी और कोतवाली, बस्ती के गांधीनगर निवासी रत्नाकर अभी फरार है।

बैंक कर्मी की भूमिका संदिग्ध

एसपी सिटी विनय कुमार सिंह ने बताया कि जालसाज ने एसबीआई सूरजकुंड शाखा के कर्मचारी मंसूर खां से मिलकर डॉक्टर के खाते की जानकारी जुटाई थी। मंसूर से ही उन्होंने डॉक्टर के खाते से जुड़े मोबाइल नंबर का भी पता लगा लिया। बाद में उस मोबाइल नंबर के गायब होने की गुमशुदगी दर्ज कराकर उस नंबर को उन्होंने बंद कर दिया। खाते से दूसरा मोबाइल नंबर जुड़वाकर इंटरनेट बैंकिंग शुरू करा दी। इसके बाद वे खाते में रकम आने का इंतजार करते रहे। करीब दो माह पहले 10 लाख रुपये खाते में आने पर उन्होंने रकम निकाल ली।

कानपुर और गोरखपुर खाते में भेजा था रकम

जालसाज ने कानपुर के एसबीआई और गोरखपुर के इलाहाबाद बैंक के एक खाते में भेजी गई थी। इंटरनेट बैंकिंग की मदद से जालसाजी की गई थी। इलाहाबाद बैंक से एक 8:50 लाख रुपये का एक इलेक्ट्रानिक्स फर्म के नाम से डिमांड ड्राफ्ट बनवाया। फर्म के संचालक को पांच प्रतिशत कमीशन देकर उन्होंने बाकी रकम खुद ले ली। खाते में बचे शेष 1:50 लाख रुपये उन्होंने नकद निकाला था।
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