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कश्मीर में छिपे आतंकियों को भी की थी फंडिंग

Tue, 27 Mar 2018 01:06 AM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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आराेपी भाई। - फोटो : Amar Ujala
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टेरर फंडिंग से जुड़े गोरखपुर के कारोबारी भाई नसीम अहमद और अरशद नईम कश्मीर में छिपे पाकिस्तान आतंकियों को भी फंडिंग करते थे। इसकी जानकारी एटीएस की पड़ताल के दौरान हाथ आए सबूतों से मिली है। सूत्रों के मुताबिक कारोबारी भाइयों द्वारा खोले गए एक फर्जी खाते में कश्मीर से रुपये जमा किए गए थे और उसी दिन कश्मीर के एक खाते में उसे ट्रांसफर कर दिया गया। यही नहीं, कारोबारी भाइयों की डील सीधे पाकिस्तानी हैंडलरों से होती थी। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा एक हैंडलर दोनों भाइयों को फर्जी खाता खुलवाकर और उसमें धन जमा कराने का निर्देश देता था।
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अभी तक की एसटीएफ की छानबीन में सामने आया है कि विभिन्न स्थानों से गिरफ्तार किए गए 10 आरोपियों में से कारोबारी भाइयों के अलावा दो अन्य भी पाकिस्तानी हैंडलर से सीधे जुड़े थे, जबकि बाकी आरोपियों को इसकी जानकारी नहीं थी। वे स्थानीय स्तर पर मददगार थे। एसटीएफ ने शनिवार को गोरखपुर में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर छह लोगों को गिरफ्तार किया था। चार अन्य लोग दूसरे स्थानों से पकड़े गए थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मोबाइल के कारोबार से जुड़े नईम एंड संस के मालिक नईम अहमद के पुत्र नसीम अहमद और अरशद नईम भी शामिल हैं।

एसटीएफ ने कैंट क्षेत्र के बलदेव प्लाजा और कोतवाली क्षेत्र के दो शापिंग कांपलेक्स में स्थित उनकी दुकानों पर भी छापेमारी की थी। वहां से कंप्यूटर हार्ड डिस्क, लैपटॉप, पेन ड्राइव और कई दस्तावेज कब्जे में लिए गए थे। एसटीएफ के आईजी असीम अरुण के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों का संबंध पाकिस्तान में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों से है। उनके बताए गए लोगों को आरोपी धन मुहैया कराते थे। इससे जुड़े खातों से हुए लेनदेन की पड़ताल की जा रही है।
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नेपाल के कैसीनाे थे गिरोह के अड्डे
टेरर फंडिंग से जुडे़ गिरोह का अड्डा नेपाल के कई कैसीनो थे। यहीं से पूरा नेटवर्क संचालित होता था। एटीएस की छानबीन में यह भी पता चला है कि आतंकियों तक रुपये पहुंचाने में वे लोग इन कैसीनो का भी इस्तेमाल करते थे। हवाला के जरिये रुपये मंगाए और भेजे जाते थे। एटीएस ने शहर में ऐसे कई लोगों को चिह्नित किया है। साथ ही स्थानीय पुलिस को संपर्क में लेकर उनकी गतिविधियों की जानकारी मांगी है।

एटीएस के पास है बातचीत की रिकार्डिंग
टेरर फंडिंग की भनक एटीएस को छह-सात महीने पहले ही लग गई थी। तभी से वह पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी थी। नेटवर्क से जुड़े लोगों के मोबाइल सर्विलांस पर थे। एटीएस के पास आरोपी नईम एंड संस के संचालक नसीम अहमद और अरशद नईम की पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन से जुड़े टेंडर फंडिंग का इंतजाम करने वाले एक प्रमुख व्यक्ति से सीधी बातचीत की रिकार्डिंग भी है। एटीएस के आईजी असीम अरुण के मुताबिक पाकिस्तानी हैंडलर कारोबारी भाइयों को सीधे फोन कर निर्देश देता था। गिरफ्तार प्रतापगढ़ के रानीगंज निवासी संजय सरोज, और रीवां, मध्य प्रदेश निवासी शंकर सिंह की भी सीधी बातचीत पाकिस्तानी में बैठे गिरोह प्रमुख से होती थी।

आरोपी नईम को जीडीए का नोटिस
मानचित्र के मुताबिक निर्माण न कराने पर जीडीए ने टेरर फंडिंग के आरोपी नईम अहमद को नोटिस भेजकर सप्ताह भर में जवाब-तलब किया है। प्राधिकरण के अफसरों का कहना है कि जवाब सहीं नहीं मिलने की दशा में उनका मकान सील कर दिया जाएगा। दो दिन पहले एटीएस के हत्थे चढ़े नईम का हरिओम नगर में आलीशान मकान है। एटीएस की इस कार्रवाई के बाद सतर्क प्राधिकरण ने उनके मकान की जांच शुरू कर दी है। मुख्य अभियंता संजय सिंह ने अवर अभियंता भरत सिंह से जब जांच कराई तो पता चला कि उसने वर्ष 2011 में मानचित्र स्वीकृत कराया था मगर निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई। जहां प्रतिबंधित था वहां भी निर्माण करा लिया गया।

पत्नी व मां ने दयाराम को निर्दोष बताया 
टेरर फंडिंग के आरोप में पकड़े गए रामनगर कड़जहां निवासी दयानंद को उसकी पत्नी इंदू और मां मीरा देवी ने निर्दोष बताया है। दयानंद के बचपन में ही उसके पिता का निधन हो गया था। वह विकलांग भी है। पत्नी इंदु के मुताबिक पेट्रोल पंप पर काम करने वाला दयानंद गुरुवार को घर आया था और शनिवार को फिर आने की बात कहकर ड्यूटी पर गया था। इसी बीच उसकी गिरफ्तारी की खबर मिली। पत्नी व मां ने बताया कि आतंकी संगठन को फंडिंग के मामले में दयानंद को फर्जी ढंग से फंसाया गया है। दयानंद ही अकेले घर का खर्च चलाता था। छोटा भाई देवानंद बेरोजगार है और बहन पूजा हाईस्कूल में पढ़ती है। इसके अलावा परिवार में बेटी लाडली, बेटा अंकित व अंदित हैं। 

छात्र बनकर रहता था मुशर्रफ
भरवलिया के मधुबाला निवास पर छापा मारकर किराए पर रहने वाले कुशीनगर के पडरौना निवासी मुशर्रफ उर्फ डब्लू को पकड़ा गया था। मुशर्रफ खुद को छात्र बताता था। वह अपना नाम निखिल राय बताता था। आसपास रहने वालों के मुताबिक उसके घर आए दिन लोग लग्जरी गाड़ी से आते थे। कुछ दिनों तक एक लड़की भी वहां रह रही थी जो खुद उसकी बहन बताती थी। 
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