गोरखपुर। पुलिस की ओर से की गई जांच में निजी वाहन संचालकों से मनमानी वसूली की जानकारी मिली है। पता चला कि पैडलेगंज से लखनऊ जाने और आने वाली हर बस के संचालक से 800 रुपये वसूले जाते थे। फिर उस रकम का हिस्सा बांटा जाता था। हिस्सा किनके पास तक जाता था, उसके लिए कुछ लोगों से पूछताछ भी की जा सकती है। वाहन संचालन का प्रमुख केंद्र पैडलेगंज चौराहा है। इस मामले की जांच रिपोर्ट सोमवार को शासन को भेज दी गई है। माना जाता है कि मामले में कुछ और अधिकारियों पर भी सख्ती हो सकती है। कार्रवाई के डर से कुछ अधिकारी सहमे हैं।
निजी वाहन संचालकों के बीच विवाद में पड़े सीओ ट्रैफिक संतोष सिंह को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पुलिस की जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। जांच से पता चला कि सीओ ट्रैफिक से बस संचालक विनय सिंह की शिकायत कल्लू सिंह ने की थी। कल्लू सीओ के रिश्तेदार हैं। रिश्तेदार के कहने पर ही सीओ गत शुक्रवार को पैडलेगंज गए थे, फिर विनय सिंह पर मुकदमा दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कराया था। इसकी शिकायत विनय की पत्नी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की थी।
मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने जांच की जिम्मेदारी आईजी रेंज जयनारायण सिंह को दी थी। आईजी ने जांच की तो पता चला कि रिश्तेदार के कहने पर सीओ ट्रैफिक ने विवादित मामले में दखल दिया।
सपा शासन में कल्लू की तो अब विनय की चली
पुलिस की जांच के मुताबिक सपा सरकार में कल्लू सिंह की चलती थी। उनके निर्देशन में बसों का संचालन होता था। अब स्थिति बदल गई थी। विनय सिंह हावी हो गए थे। इसी वजह से विवाद बढ़ा और मामले में कानूनी कार्रवाई तक हुई। पैडलेगंज में अवैध स्टैंड से 50 से ज्यादा बसें और टेंपो ट्रेवलर चलते हैं। इन सबसे हर चक्कर में वसूली होती है।
जांच में बयान दर्ज किए गए
आईजी जयनारायन सिंह ने अवैध वसूली की जांच में बस मालिक के अलावा सीओ ट्रैफिक, उनके गनर, सीओ कैंट, इंस्पेक्टर कैंट, पैडलेगंज चौकी इंचार्ज, बस मालिक कल्लू सिंह और मुकदमा दर्ज कराने वाले कल्लू के भाई जीत प्रकाश सिंह का बयान लिया। बस मालिक विनय सिंह के जेल में होने के कारण उनका बयान दर्ज नहीं हो पाया। उनकी पत्नी सीमा सिंह का बयान दर्ज किया गया। इन लोगों के बयान के आधार पर आईजी ने रिपोर्ट शासन को भेजी है।
पद के दुरुपयोग में नपे सीओ ट्रैफिक
सीओ ट्रैफिक संतोष सिंह पद के दुरुपयोग के मामले में नपे हैं। आईजी की जांच में भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। जांच से पता चला कि संतोष के रिश्तेदार कल्लू सिंह की बस चलती है और उन्हीं के कहने सीओ वहां गए थे। नियमानुसार, शिकायत पर सीओ कैंट या फिर इंस्पेक्टर कैंट को वहां पहुंचना चाहिए था। यही नहीं, अपने बयान में कल्लू सिंह ने सीओ ट्रैफिक के दूर का रिश्तेदार होने की बात स्वीकार की है। लिहाजा यहां पद के दुरुपयोग का मामला बन गया है।