बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर में पूरे दिन डॉ. आरती की मौत को लेकर चर्चाएं चलती रहीं। कहीं पुलिस को मिली उस डायरी की चर्चा थी, जिसके कवर पर ‘टू पापा’ दर्ज था तो किसी कि जुबां पर उस चॉकलेट का जिक्र था जिसे वह सहेली के लिए पैक रखकर छोड़ गई थी।
हालांकि, वह डायरी पुलिस के कब्जे में थी। उसका मजमून क्या था इस पर कोई पुख्ता बात नहीं कह रहा था लेकिन सुनी-सुनाई बातें खूब हुईं। सहेली के पास से पुलिस तक पहुंची डायरी के बारे में जैसी चर्चाएं चल रही थीं, उसके मुताबिक उसे कुछ लोग पढ़ चुके थे। कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें भी ऐसे ही पता चला है कि डायरी के कई पेजों पर आरती ने पापा के लिए संदेश लिखा था। हिंदी और अंग्रेजी में लिखी गई इस डायरी में आरती ने अपनी पूरी मनोदशा बयां की है। डायरी के अंतिम पेज पर उसने मौत को गले लगाने का कारण भी लिखा है। पुलिस ने इस डायरी के आधार पर बीआरडी के एक रेजिडेंट डॉक्टर से पूछताछ की। फिलहाल, पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है, लेकिन अभी कोई ठोस धारणा न बनाते हुए वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
दहशत में एक रेजिडेंट डॉक्टर
बीआरडी में घटना के पीछे प्रेम प्रसंग की भी चर्चा रही। पुलिस ने डायरी को आधार बनाते हुए एक रेजिडेंट डॉक्टर से पूछताछ भी की है। इसके साथ ही पुलिस ने डॉ. आरती की सहेलियों से भी पूछताछ की है। घटना के बाद रेजिडेंट डॉक्टर में दहशत में थे।
तो अंतरजातीय प्रेम है कारण
पुलिस अभी डायरी और उसमें बयां किए गए प्रेम प्रसंग को आत्महत्या का कारण मान रही है। पुलिस मान रही है कि अंतरजातीय इस प्रेम को अपने परिवार में स्वीकार करा पाने में नाकामयाबी से ही आरती निराशा में डूब गई। इसके चलते ही उसने ऐसा कदम उठाया।
बीआरडी प्राचार्य जवाब देने से बचे
बीआरडी प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने क्राइमसीन पर पत्रकारों को जाने से रोका। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया से दूरी बना ली। देर रात हुई इस घटना की जानकारी पुलिस और परिवार को देने में भी उनकी ओर से देर हुई। आरती के भाई प्रशांत ने बताया कि करीब ढाई घंटे तक मौत की खबर दबाए रखी गई।
गाइनो ओटी में रखा गया शव
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शव मोर्चरी में न रखवाकर उसे गाइनो विभाग की ओटी में रखवाया। सुबह जब फुफेरा भाई विवेकानंद वहां पहुंचे तो उन पर शव लेकर जाने के लिए दबाव बनाया गया। दोपहर बाद जब आरती का पूरा परिवार वहां पहुंचा तो परिस्थितियों को लेकर हंगामा किया।
सीओ से लेकर एसएसपी तक गुहार
आरती के भाई ने यहां सामने आए तथ्यों के बाद सीओ से लेकर एसएसपी तक से न्याय की गुहार लगाई। सीओ से बीआरडी में बात की तो एसएसपी को उन्होंने मोर्चरी के सामने से फोन किया। बीआरडी प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने बहन के लिए इंसाफ मांगा।
न व्हाट्सएप पर डीपी और न फेसबुक प्रोफाइल
आज के दौर में भी आरती सोशल मीडिया से दूर थीं। हालांकि, वह व्हाट्सएप तो चलाती थीं लेकिन इस पर डीपी नहीं लगा रखी थी। फेसबुक पर उन्होंने प्रोफाइल भी नहीं बनाया था। भाई प्रशांत ने कहा कि वह मेधावी थी और सोशल मीडिया पर सक्रियता को वक्त की बर्बादी कहती थी।