घटना के बाद डॉ. आरती के घरवाले मेडिकल कॉलेज पहुंचे।
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डॉ. आरती चंद महीनों में एमएस होने वाली थीं, लेकिन नियति को यह मंजूर नहीं था। पढ़ाई पूरी होने से पहले संदिग्ध परिस्थितियों में वह दुनिया छोड़ र्गइं। सूचना पाकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचे पिता विजयकांत झा ने लाडली को याद करते हुए कहा कि आरती के लिए कभी फीस नहीं भरनी पड़ी। समस्तीपुर में 12वीं तक पढ़ाई रही हो या फिर किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ में एमएमबीबीएस आरती हमेशा टॉपर रही।
आरती की मेधा की बात करते विजयकांत फफक पड़े, तो मां मीरा बोलीं, रात करीब 10 बजे तो उससे बात हुई थी। हंसी-खुशी उसने हालचाल लिया। न तो वह उदास लगी और न बीमार। रात करीब ढाई बजे जब बीआरडी से आई कॉल से उसके न होने की सूचना मिली तो यकीन ही नहीं हुआ। यहां लोग कह रहे हैं कि उसने खुदकुशी की है, लेकिन उसके शरीर पर चोट के निशान कुछ और ही इशारा कर रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन की भूमिका भी संदेह बढ़ा रही है। रेजिडेंट डॉक्टर की मौत पर भी कॉलेज प्रशासन का कोई व्यक्ति झूठा दिलासा भी देने नहीं आया। बीआरडी प्रशासन का रवैया देखने के बाद हमें यहां होने वाले पोस्टमार्टम पर भरोसा नहीं है। हम समस्तीपुर में बेटी का दोबारा पोस्टमार्टम कराएंगे।