अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। आयकर विभाग से गर्दन बचाने के लिए निलंबित एआरटीओ आरएस यादव ने पेशबंदी कर गोरखपुर के बेतियाहाता में अपने पिता के नाम जमीन खरीदकर आलीशान कांप्लेक्स बनवाया था जबकि वे साधारण किसान थे। जीडीए की फाइलों से इसका खुलासा हुआ है कि वर्ष 2004 में आरएस यादव के पिता फौजदार यादव के नाम कांप्लेक्स का मानचित्र स्वीकृत हुआ था। जमीन को लेकर नगर निगम और तहसील प्रशासन की तरफ से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जारी किया गया है।
कांप्लेक्स मानचित्र के मुताबिक बना है या नहीं, इसपर अब जीडीए उपाध्यक्ष ओएन सिंह ने जांच बैठा दी है। जेई ज्ञानेश्वर सिंह को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। उपाध्यक्ष ने सात दिन के भीतर उनसे रिपोर्ट मांगी है। उनका कहना है कि मानचित्र के मुताबिक निर्माण नहीं मिलने पर प्राधिकरण शहरीय विकास अधिनियम के तहत संबंधित कांप्लेक्स मालिक पर कार्रवाई करेगा। यही नहीं, उपाध्यक्ष के मुताबिक उन्होंने अनापत्ति प्रमाण पत्र की जांच आदि को लेकर डीएम से भी अपने स्तर से जांच करा लेने की सिफारिश की है।
बता दें कि सहजनवां के तिवरान गांव के मूल निवासी आरएस यादव की जौनपुर में गिरफ्तारी के बाद एक-एक कर वाराणसी, गोरखपुर समेत उनकी अकूत संपत्तियों का खुलासा होने लगा है। गोरखपुर के बेतियाहाता स्थित आलीशान कांप्लेक्स को लेकर यहां भी जीडीए ने सतर्कता दिखाते हुए पड़ताल शुरू कर दी है। प्राधिकरण ने नोटिस जारी कर कांप्लेक्स के मालिक से मानचित्र का साक्ष्य तलब किया था। इसी बीच जीडीए ने कांप्लेक्स से जुड़ी एक दशक से पहले की फाइल तलाशी। इससे पता चला कि कांप्लेक्स निलंबित एआरटीओ के स्व. पिता फौजदार यादव के नाम है, जिनकी करीब आठ साल पहले मौत हुई थी। उन्हीं के नाम से मानचित्र भी स्वीकृत हुआ था।