गलत रास्ते से नौकरी पाने के चक्कर में दो बहनों ने गंवाए तीन लाख
विष्णु त्रिपाठी
गोरखपुर। कैंट इलाके के सिंघड़िया की दो बहनों ने रिश्वत देकर नौकरी पाने के चक्कर में तीन लाख रुपए गंवा दिए। दोनों के लालच का फायदा उठाते हुए एक जालसाज ने झांसा देकर वारदात को अंजाम दिया। बहनों का आरोप है कि युवक ने खुद को सेंट एंड्रयूज पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग का सीनियर लेक्चरर बता कर जालसाजी की। उसने एक को नर्स तो दूसरी बहन को लखनऊ मेट्रो में नौकरी दिलाने का वादा किया था। बुधवार को दोनों पीड़िताओं की फरियाद सुनने के बाद एडीजी ने सीओ कैंट रोहन प्रमोद बोत्रे को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए।
जालसाजी का आरोप अमित यादव नाम के एक व्यक्ति पर है। लालच के चलते ठगी का शिकार हुई मूल रूप से देवरिया की रहने वाली संगीता व स्वाति यादव का मकान नीना थापा में है। संगीता शादी के बाद अपनी ससुराल सिंघड़िया में पति उमेश के साथ रहती हैं। वह तीन वर्ष पहले जब यूनिवर्सिटी में स्नातक में प्रवेश लेने गई थीं, तो वहां उनको अमित यादव नाम का व्यक्ति मिला। उसने धीरे-धीरे पहचान बनाई। युवक खुद को सेंट एंड्रयूज कॉलेज का लेक्चरर बताता रहा। उसने संगीता की छोटी बहन का पहले सेंट एंड्रयूज में स्नातक में प्रवेश कराकर विश्वास हासिल किया। उसके बाद वह संगीता को नर्स की नौकरी दिलाने के लिए कई बार में 1.5 लाख रुपये और दसवीं से स्नातक तक की मार्कशीट भी ले ली। आरोप के मुताबिक उसने स्वाति का लखनऊ मेट्रो में नौकरी दिलाने के नाम पर पहले 30 हजार और जून 2019 में ज्वाइन कराने के लिए 1.20 लाख रुपये ले लिए। उसके बाद वह फरार हो गया। बहनें जब उसे खोजती हुईं कॉलेज गईं तो वहां बताया गया कि उस नाम का कोई शिक्षक नहीं है। संगीता ने एडीजी से बताया कि उसने बहन की नौकरी के लिए गहने गिरवी रखकर रकम दी थी। जब दोनों बहनें कैंट थाने में गईं तो वहां पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद वे एडीजी के पास पहुंची।
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कई लोगों से लिए हैं रुपये
दोनों पीड़िताओं ने एडीजी को बताया कि आरोपी देवरिया की न्यू कॉलोनी का रहने वाला है। उसने रकम लेने के लिए हमेशा यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में ही बुलाया। आरोपी ने ईशा, रामप्रवेश, रोहित सहित करीब छह और विद्यार्थियों से प्रवेश कराने के नाम पर 30-30 हजार रुपये लिए हैं।
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दो बहनें शिकायत लेकर आईं थी। मामला गंभीर है। सीओ कैंट को सात दिन कि भीतर जांच कर कार्रवाई कराने के निर्देश दिए गए हैं। - दावा शेरपा, एडीजी
सोने की ईंट खरीदने के चक्कर में डॉक्टर साहब गंवा बैठे चार लाख
आखिर कौन है कसूरवार
गोरखपुर। अपने शहर के ही एक डॉक्टर औने-पौने दामों में सोने की ईंट खरीदने के चक्कर एक मजदूर से मरीज के हाथों चार लाख गंवा बैठें है। अब चूंकि पैसा भी हाथ से गया और सच जानने के बाद थू-थू होगी, लिहाजा उन्होंने मामले में एफआईआर दर्ज नहीं कराई। लिहाजा हम उनके नाम का खुलासा नहीं कर रहे हैं। वे अपने संबंधों की दम पर पैसा पाने के लिए जयपुर में कई बार हाथ-पैर मार चुके हैं। कहानी कुछ ऐसी है कि एक मजदूर सरीखा व्यक्ति शहर के एक ठीक-ठाक डॉक्टर के घर अपने बच्चे का इलाज कराने आता था। कई बार फीस दिया, एक दिन उसने बताया कि उसके पास नकद पैसा नहीं है, मगर उसे खुदाई में कुछ चांदी के सिक्के मिले हैं, वह दे सकता है। उसने डॉक्टर साहब को कुछ सिक्के दिए और बताया कि ऐसे कई सिक्के उसके पास हैं। डॉक्टर ने उसे सर्राफ के यहां जंचवाया, सभी खरी चांदी के निकले। डॉक्टर साहब ने बहुत कम दाम में उससे सारे सिक्के खरीद लिए। बाद में डॉक्टर ने उससे सोने की एक चार लाख की ईट भी खरीदी, वह जांच में पीतल की निकली। अब डॉक्टर उस मजदूर को तलाश रहे हैं। मजदूर ने खुद को भरतपुर का बताया था, डॉक्टर उसकी तलाश में हाथ-पैर मार रहे हैं।
गैरकानूनी काम हो गया तो ठीक, वरना बन जाते हैं पीड़ित
दरअसल, धोखाधड़ी एक ऐसा अपराध है, जो कथित पीड़ित के चलते होता है। धोखाधड़ी के ज्यादातर मामलों में पुलिस तक पहुंचने वाले पीड़ित के शक्ल में आते हैं, सही मायने में वही इस वारदात का कारण बनते हैं। वे गड़ा हुआ धन औने-पौने दामों में खरीदते वक्त एक बार भी नहीं सोचते कि यह गलत है। वे मंहगी चीजें बेहद कम दाम में खरीदने को तैयार हो जाते हैं। नौकरी के लिए रकम देने में उन्हें कोई गुरेज नहीं होता, जबकि उन्हें यह पता होता है कि वे कानूनन सही नहीं है। और जब कोई उनके इसी लालच का फायदा उठा कर लाखों की चपत दे जाता है तो वे रोते हुए पुलिस के पास पहुंच जाते हैं कि उन्हें ठग लिया गया। यह कानून का दोष है कि मामला पुलिस तक पहुंचते ही वे मासूम और वारदात अंजाम देने वाला अपराधी बन जाता है। ंविधि विशेषज्ञ मानते हैं कि धोखाधड़ी के कानून में संशोधन होना चाहिए। इसमें पीड़ित के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया जाना चाहिए।