जिला कांग्रेस कमेटी के विरोध को दरकिनार कर पार्टी आलाकमान ने जिलाध्यक्ष डॉ. सैय्यद जमाल का कद बढ़ा दिया है। उन्हें दिल्ली नगर निगम चुनाव के लिए कांग्रेस का पर्यवेक्षक बनाया गया है। इस प्रकरण को जिलाध्यक्ष के विरोधियों के लिए झटके के रूप में देखा जा रहा है। यह पहला मौका है, जब गोरखपुर के किसी कांग्रेसी को दिल्ली नगर निगम के चुनाव में पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी मिली है।
गोरखपुर में कांग्रेस दफ्तर विहीन हो गई है। इससे जिले के ज्यादातर कांग्रेसी भड़के हुए हैं। इसी सिलसिले में पूर्व विधायक और जिलाध्यक्ष लालचंद निषाद की अध्यक्षता में एक मीटिंग भी हुई थी। इसमें कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. सैय्यद जमाल के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया गया और आरोप लगाया गया कि दफ्तर खाली करने से संबंधित मामले की पैरवी अदालत में जानबूझकर नहीं की गई। इससे कांग्रेस को 55 साल पुराना दफ्तर खाली करना पड़ा। कांग्रेसियों ने जिलाध्यक्ष को हटाने का अभियान भी छेड़ दिया। पूरे मामले की शिकायत कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी की गई लेकिन फायदा नहीं हुआ। बुधवार को ही पार्टी आलाकमान ने जिलाध्यक्ष का कद बढ़ाने का आदेश जारी कर दिया। अब जिलाध्यक्ष विरोधी सदमे में हैं।
लखनऊ में 16 अप्रैल की मीटिंग पर निगाह
दफ्तर विहीन कांग्रेस का मामला 16 अप्रैल को लखनऊ में होने वाली मीटिंग में भी उठ सकता है। इस मीटिंग में सभी जिलाध्यक्ष बुलाए गए हैं लेकिन गोरखपुर के वरिष्ठ कांग्रेसी भी लखनऊ पहुंचने की तैयारी में हैं, जो मामले की शिकायत करेंगे और बताएंगे कि दफ्तर खाली कराने के पीछे साजिश है। इसमें जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी भी शामिल हैं। वहीं, जिलाध्यक्ष डॉ. सैय्यद जमाल का कहना है कि कुछ कांग्रेसियों के आरोप बेबुनियाद हैं। अब पार्टी ने नई जिम्मेदारी दी है। इसका निर्वहन करने को तैयार हूं।