बीए टॉपर शिवांगी पांडेय की पहेली सुलझाने के लिए गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने बृहद कार्रवाई शुरू कर दी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसके लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी न केवल शिवांगी पांडेय प्रकरण की जांच करेगी बल्कि उन सभी टॉपरों की पड़ताल भी करेगी, जिनके नाम 2015-16 सत्र के टॉपरों की सूची में हैं। इतना ही नहीं, कमेटी पिछले वर्ष के टॉपरों की सच्चाई पर भी गहन मंथन करेगी।
प्रकरण की सच्चाई जानने के लिए बनाई गई कमेटी की कमान हिंदी विभाग के अध्यक्ष चितरंजन मिश्र को सौंपी गई है। प्रो. अजेय कुमार गुप्त, विधि विभाग के प्रो. नसीम अहमद कमेटी के सदस्य बनाए गए हैं। परीक्षा नियंत्रक डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह को सदस्य सचिव के तौर पर कमेटी में जगह दी गई है। कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि वर्ष 2016 की श्रेष्ठता सूची घोषित होने के बाद बीए की टॉपर छात्रा शिवांगी के बारे में कई गोपनीय शिकायतें मिली हैं। यूनिवर्सिटी की ओर से दस्तावेज सत्यापन के लिए इस छात्रा के न आने और इसे लेकर संपर्क न करने से इन शिकायतों पर अपुष्ट मुहर भी लगी है। ऐसे में प्रकरण का परीक्षण किया जाना जरूरी है। इसीलिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है, जो पूरे मामले की गहन पड़ताल करके जल्द से जल्द रिपोर्ट देगी। यदि शिकायत सही पाई गई तो न केवल टॉपर की सूची में संशोधन किया जाएगा, बल्कि इस धांधली के दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
ऐसे उलझा टॉपर का मामला
2015-16 सत्र की बीए टॉपर को लेकर मामला शक के घेरे में तब आ गया जब देवरिया के रेशमा देवी महाविद्यालय अमवा सोहनरिया की टॉपर छात्रा शिवांगी पांडेय यूनिवर्सिटी की ओर से दस्तावेजों की पड़ताल के लिए जारी तिथि पर नहीं पहुंची। इस बीच एक गुमनाम पत्र ने मामले को और उलझा दिया, जिसमें आरोप था कि कॉलेज की प्राचार्य और परीक्षा के दौरान केंद्राध्यक्ष बनीं डॉ. नीलम पांडेय और टॉपर शिवांगी पांडेय एक ही हैं। इस गुमनाम पत्र के मिलते ही मामला और संगीन हो गया। हालांकि नीलम पांडेय इस बात से सीधे तौर पर इन्कार कर रही हैं लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने इस प्रकरण से अपना पीछा छुड़ाते हुए प्राचार्य डॉ. नीलम को निलंबित कर दिया। मामले को गंभीर रुख लेता देख यूनिवर्सिटी प्रशासन भी गंभीर हुआ, जिसका नतीजा चार सदस्यीय कमेटी का गठन है।