शुक्रवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी की प्रवेश समिति द्वारा लिया गया एक फैसला उन कॉलेज प्रबंधकों के गले नहीं उतर रहा, जिन्होंने बीएससी की सीट बढ़ाने के लिए आवेदन किया था। प्रवेश समिति की ओर से सीट वृद्धि के लिए स्थलीय निरीक्षण की शर्त प्रबंधकों को परेशान किए हुए है। इसे लेकर प्रभावित प्रबंधक कुलपति से मिलकर अपना पक्ष रखने की तैयारी में हैं।
प्रबंधकों का तर्क है कि सीट वृद्धि को लेकर जारी शासनादेश में संसाधनों के परीक्षण की बात कही गई है न कि स्थलीय निरीक्षण की। स्थलीय निरीक्षण का सवाल तो तब पैदा होता है जब कक्षा बढ़ाने का आवेदन किया गया हो। यहां तो एक ही कक्षा में 20 सीट बढ़ाने का आवेदन किया गया है। प्रबंधकों का यह भी सवाल है कि यदि सीट वृद्धि को लेकर हुए स्थलीय निरीक्षण में कॉलेजों में मानक के अनुरूप संसाधन नहीं मिले तो पहले हुए स्थलीय निरीक्षण में ससांधनों के मानक पर ‘ओके’ का मुहर लगाने वाले निरीक्षण मंडल पर यूनिवर्सिटी क्या कार्रवाई करेगा? प्रबंधकों का कहना है कि ऐसा कभी नहीं हुआ कि सीट वृद्धि के लिए दोबारा स्थलीय निरीक्षण हुआ हो। प्रबंधक प्रवेश समिति की इस कार्रवाई को महाविद्यालय व्यवस्था में गैर जरूरी हस्तक्षेप मान रहे हैं।
बता दें कि प्रवेश समिति ने बीए और बीकॉम में तो मानक पूरा करने का कागजी साक्ष्य देखकर सीट बढ़ाने की अनुमति दे दी थी लेकिन बीएससी के लिए लैब और लाइब्रेरी आदि संसाधनों के स्थलीय निरीक्षण की शर्त रखी है।
एक ही कक्षा में सीट वृद्धि के लिए कॉलेज संसाधनों की दोबारा स्थलीय पड़ताल दुर्भाग्यपूर्ण है। जिन संसाधनों पर एक बार निरीक्षण मंडल ने अपनी मुहर लगा दी है, उसका दूसरे निरीक्षण मंडल द्वारा स्थलीय निरीक्षण औचित्यहीन है।
- डॉ. सुधीर कुमार राय, महामंत्री, स्व-वित्तपोषित महाविद्यालय प्रबंधक महासभा
बीएससी की कक्षाओं के लिए विद्यार्थियों की संख्या के मुताबिक लैब और किताबों का होना बेहद जरूरी है। यही देखते हुए दोबारा स्थलीय निरीक्षण का फैसला लिया गया है। इस दौरान मानक पर खरा उतरने के बाद ही सीट बढ़ाने की अनुमति मिलेगी।
- प्रो. अशोक कुमार, कुलपति, गोरखपुर यूनिवर्सिटी