संभाग के बैंक अधिकारियों के स्वयंभू आदेशों के चलते क्षेत्र में भारतीय मुद्रा छोटे सिक्कों का प्रचलन मुश्किल हो गया है। रिजर्व बैंक कहता है कि सिक्कों को लेने से कोई इंकार नहीं कर सकता, मगर बैंकों का कहना है, जाओ हम नहीं लेते, रिजर्व बैंक में जमा कराओ। जहां चाहे शिकायत करो। बैंकों की इस हठधर्मिता का असर यह है कि छोटे सिक्के जिनके पास हैं, उन्हीं का सिरदर्द बनते जा रहे हैं। छोटे कारोबारी परेशान हैं। रास्ता ही नजर नहीं आ रहा क्या करें। उन्हें ऐसा लग रहा जैसे विदेश आ गए, जहां भारतीय मुद्रा प्रचलन में ही नहीं। सुनने में यह समस्या जितनी छोटी लग रही है। भविष्य में इसके नतीजे कितने गंभीर होंगे, प्रशासनिक अधिकारी इसे शायद समझ ही नहीं पा रहें, वरना यह समस्या कब की समाप्त हो गई होती। इस समस्या से त्रस्त कुछ आम शहरी अमर उजाला पहुंचे। सवाल किया बैंक के प्रशासनिक अधिकारियों को समझाने के लिए कानून हाथ में लें या हाथ पर हाथ धर कर बैठ जाएं। अमर उजाला ने उन्हें सलाह दी कि यह हक की लड़ाई है, न कानून हाथ में लें, ना हाथ पर हाथ धर कर बैठें। सिक्कों के सामान्य प्रचलन होने तक एक लंबी लड़ाई के लिए तैयार हो जाएं।
सिक्का वापसी का अनिवार्य नियम
आरबीआई अधिनियम के अनुसार परिचालन (बाजारों में सामानों के क्रय विक्रय के बाद कीमतों की अदायगी) के लिए सिक्के भारतीय बैंक के माध्यम से जारी किए जाते हैं। ऐसे में इन सिक्कों का बैंकों द्वारा दिया जाना जितना अनिवार्य है, उतना ही उनको वापस लेना भी, लेकिन कर्मचारियों की कमी बताकर कई बैंक सिक्के जमा करने गए लोगों वापस कर दे रहे हैं। सभी बैंकों के अधिकारी इस मसले पर अलग अलग तर्क देते हैं।
केस-1
अमित कुमार जगनानी जनरल आइटम के थोक व्यापारी हैं। ग्रामीण इलाकों से आने वाले ज्यादातर दुकानदार सिक्के लेकर ही आते हैं। इनके साथ व्यापार करना है, लिहाजा मजबूरी में वो इन सिक्कों को लेते हैं। कहते हैं कि बैंकों में इन सिक्कों को जमा करना बहुत ही मुश्किल हो गया है। अब तो 10 रुपये के सिक्के को लेकर भी दिक्कत होने लगी है। बैंक वाले 10 के नोटों की गड्डी भी अब मना करने लगे हैं।
केस-2
रुस्तमपुर बगहा बाबा मंदिर के पास स्थित किराना दुकान के मालिक पंकज मिश्रा के पास करीब 20 हजार रुपये के सिक्के जमा हैं। जब भी बैंक इन सिक्कों को जमा करने जाते हैं तो बैंककर्मी वापस कर देते हैं। पंकज कहते हैं कि बैंक वाले कहते हैं- ‘इन सिक्कों को गिनेगा कौन’। ग्राहकों को कुछ कुछ सिक्के वापस करता हूं, लेकिन अगला ग्राहक कई सिक्के थमा देता है। फिर से वैसी ही स्थिति हो जाती है।
सिक्के न लें तो मुझसे बताएं: कमिश्नर
सिक्के नहीं लेने से जुड़ी कोई शिकायत मेरे पास नहीं आई। अगर किसी व्यापारी या आम आदमी के सिक्के कोई बैंक नहीं ले रहा है तो वे उसकी शिकायत मुझसे या डीएम से कर सकते हैं। आरबीआई के संज्ञान में यह मामला लाकर कार्रवाई कराई जाएगी। सिक्के लेने से कोई इनकार नहीं कर सकता है।
जयंत नार्लीकर, कमिश्नर
सिक्के जमा करने से कोई मना नहीं कर सकता है, यह लीगल टेंडर है। जरूरत के हिसाब से सिक्के लेकर बैंक जाएं, किसी तरह की दिक्कत आए तो लिखित शिकायत करें। निश्चित कार्रवाई होगी।
के. विजयेंद्र पांडियन, जिलाधिकारी
आरबीआई का जो नियम है, उसका अनुपालन बैंकों को सुनिश्चित करना चाहिए। सिक्के की वजह से कानून व्यवस्था बिगड़ी तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. सुनील गुप्ता, एसएसपी गोरखपुर
सिक्का न लेने की शिकायत मिली तो कड़ी कार्रवाई
एक रुपये या उससे बड़े सभी सिक्के मान्य हैं। ये सभी भारत सरकार के हैं और पूरी तरह से प्रचलन में हैं। कोई भी बैंक अफसर या कर्मी सिक्कों को लेने से इंकार नहीं कर सकता है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की किसी शाखा में अगर इस तरह की शिकायत आती है तो जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हो सकता है कि किसी शाखा प्रबंधक को इसकी जानकारी न हो, उन्हें रिजर्व बैंक का सर्कुलर भिजवा दिया जाएगा। हर हाल में इन सिक्कों को लेने का नियम है।
एलबी झा, क्षेत्रीय प्रबंधक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
उपभोक्ताओं की समस्याओं के निवारण के लिए रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर शिकायत प्रबंधन प्रणाली विकसित की गई है। इससे बैंकिंग से संबंधित हर तरह की समस्याएं तथ्यों के साथ भेजी जा सकती हैं।
- प्रभारी अधिकारी, रिजर्व बैंक, क्षेत्रीय कार्यालय कानपुर