एडी कन्या इंटर कालेज में इंसेफेलाईटिस से जागरूक करने के लिए बच्चों को शपथ दिलाते सीडीओ।
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इंसेफेलाइटिस से मरने वालों की संख्या में कमी आई है। बीते साल इस बीमारी से 89 मरीजों की मौत हुई थी वहीं इस साल तक अब तक 17 मरीज अपनी जान गंवा चुके हैं। बीमारी से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने और इसके लक्षण की जानकारी देने के लिए अभियान सोमवार से शुरू किया गया है। ये बातें सीएमओ डॉ. रवींद्र कुमार ने पत्रकार वार्ता के दौरान कही।
उन्होंने बताया कि इंसेफेलाइटिस की मुख्य वजह सूअर पशुपालन एवं धान की खेती के दौरान जल निकासी, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था न होना है। साथ ही मच्छरों की उत्पत्ति का स्थान बहुत हैं जो इस बीमारी को फैला रही है। क्यूलेक्स विश्नोई समूह के मच्छरों द्वारा यह बीमारी फैलती है जो मुख्यतया धान के खतों में संचित जल में अंडे देते हैं। जागरूकता अभियान 17 जुलाई तक चलेगा, जिसमें चौपाल के अलावा गांवों में रैली, गोष्ठी का आयोजन किए जाएंगे। स्कूलों में बच्चों को बीमारी के बारे में जानकारी देने के साथ ही दूषित जल का प्रयोग न करने, मच्छर से बचने आदि की शपथ दिलाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि जनपद में 23 ईटीसी क्रियाशील है जहां 24 घंटे सेवा मिलेगी। उन्होंने सुबह-शाम फागिंग, स्वच्छ जल का प्रयोग करने, तालाब के पानी का इस्तेमाल न करने, खिड़कियों पर जाली का प्रयोग करने की अपील की।
72 घंटे में दो की मौत, 16 भर्ती
मेडिकल कॉलेज में बीते 72 घंटे में इंसेफेलाइटिस से दो लोगों की मौत हो गई है। इनमें बिहार के सिवान की सुनीता (35) और सिद्धार्थनगर की नजमा खातून (17) शामिल हैं। इस दौरान 16 नए मरीज भर्ती भी किए गए। इनमें बिहार के तीन, सिद्धार्थनगर के दो, बस्ती के एक, देवरिया के तीन, कुशीनगर के दो और गोरखपुर के पांच मरीज शामिल हैं। जनवरी से अब तक अगर देखा जाए तो मेडिकल कॉलेज में 77 मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि 240 मरीजों को भर्ती किया गया।