एम्स का ओपीडी में निरीक्षण करने के बाद विजिटर रजिस्टर पर अपना विचार लिखते मुख्यमंत्री योगी आदित?
मरीजों का विश्वास जीतना बहुत जरूरी : सीएम
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एम्स में मेडिकल के छात्रों को आम लोगों में डाक्टरों के बारे में आ गई नकारात्मक धारणा को अपनी संवेदना और सेवा से बदलने को कहा। सीएम ने अपने जीवन की दो घटनाएं बताकर मरीज और चिकित्सकों के बीच बदलते रिश्तों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले शहर के एक चिकित्सक की हत्या कर दी गई। शहर के सभी लोग पोस्टमॉर्टम के बाद डॉक्टर के पार्थिव शरीर को लेकर चौराहे पर धरने पर बैठे, वह भी धरने में शामिल हुए। पुलिस से हत्यारों को सजा देने की मांग की जा रही थी। तीन दिन बाद ही डॉक्टर के हत्यारे पुलिस मुठभेड़ में मारे गए। इस घटना के कुछ साल बाद एक अन्य डॉक्टर का अपहरण हुआ। उनको छुड़वाने के लिए वह शहर के एक चौराहे पर धरना दे रहे थे। एक बुजुर्ग ने पूछा बाबा किस बात का धरना, उन्हें बताया कि चिकित्सक का अपहरण हो गया है। इस पर बुजुर्ग ने कहा कि बाबा तुम गलत व्यक्ति का साथ दे रहे हो, ये डॉक्टर नहीं कसाई हैं। लोगों को लूटते हैं। इतना कहके उन्होंने मेडिकल विद्यार्थियों को नसीहत दी कि मरीजोें में विश्वास पैदा करना बहुत जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने सुनाया एम्स का सफर
सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुशी जताई कि देश में बन रहे छह एम्स में से गोरखपुर एम्स की निर्माण गति सबसे तेज है। बताया कि 2003 में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पत्र लिखकर एम्स की मांग की थी। 2004 में यूपीए की सरकार आई और पत्र की प्रगति रुक गई। 2005 में जिले में इंसेफेलाइटिस का प्रकोप बढ़ा था। तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद बीआरडी मेडिकल कॉलेज आए थे। उन्होंने बयान दिया था कि इंसेफेलाइटिस की रोकथाम राज्य का विषय है। बयान के विरोध में उन्होंने संसद में यह मुद्दा रखा। संसद में बताया कि इंसेफेलाइटिस सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं देश के आठ अन्य राज्यों में फैला है तो कैसे राज्य का विषय हो सकता है। 2009 में राहुल गांधी से गोरखपुर में एम्स की घोषणा करने की मांग की तो उन्होंने कहा कि झांसी में एम्स दे तो दिया। उन्हें बताया कि झांसी बुंदेलखंड में आता है, जबकि गोरखपुर पूर्वांचल में। 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। उन्होेंने देखा था कि संसद के हर सत्र में पूर्वांचल में एम्स के मुद्दे को मैं किसी न किसी रूप में पेश करता था। 2016 मेें कैबिनेट ने एम्स की अनुमति दे दी। एम्स निर्माण में राज्य सरकार ने भी रोड़ा अटकाया। वह विवादित जमीन देना चाहती थी। किसी तरह जमीन की व्यवस्था कराके 22 जुलाई 2016 को शिलान्यास किया गया। 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। मुख्यमंत्री बनते ही सबसे पहला काम एम्स की राह में आने वाली हर तरह की अड़चनें दूर करने का किया। सारी औपचारिकताएं पूर्ण कराईं।
प्रदेश को मिलेंगे 14 और मेडिकल कॉलेज
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में 14 नए मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से अनुमति ली जाती है। प्रक्रिया शुरू हो गई है। 2022 में प्रदेश में 14 नए मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को प्रवेश दिलाएंगे। उन्होंने बताया कि 2016 से 2019 के बीच प्रदेश में सात नए मेडिकल कॉलेज तैयार किए गए। प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में सात सौ प्रवेश दिलवाए गए। अगलेे वर्ष आठ और नए मेडिकल कॉलेज शुरू हो जाएंगे।