सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे दिग्विजयनाथ व अवेद्यनाथ : योगी
गोरखपुर। गोरक्ष पीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ एवं अवेद्यनाथ ऐसे संत थे जो अतीत, अनागत और वर्तमान सबको प्रत्यक्षवत देखते थे। वे हिंदू समाज के रक्षक व सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे। उनकी स्मृतियां हमें नई ऊर्जा देतीं हैं। उनकी स्मृति में साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का कार्यक्रम 12 से 18 सितंबर तक गोरखनाथ मंदिर में संपन्न होगा। दिग्विजयनाथ के 125वें और अवेद्यनाथ के शताब्दी वर्ष का उद्घाटन इसी समारोह के अंतर्गत होगा।
गोरक्ष पीठाधीश्वर ने बुधवार को मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि दोनों संतों ने धर्म, संस्कृति, शिक्षा समाज एवं राष्ट्र समेत प्राय: सभी क्षेत्रों में अपने बहुआयामी व्यक्तित्व से प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई थी। अनेक धार्मिक, आध्यात्मिक एवं राष्ट्रीय मुद्दों पर सड़क से संसद तक दोनो संतों की आवाज गूंजती थी। कहा कि दोनो संत आज हमारे बीच नहीं हैं फिर भी उनके कृतित्व आज भी प्रकाश स्तंभ की तरह राष्ट्र जीवन के राजपथ पर हमारे मार्गदर्शन के लिए मौजूद हैं। कहा कि दोनो संत राष्ट्रीय जीवन की मुख्यधारा का प्रतिनिधित्व करने वाली हिंदू जीवन पद्धति से अनुप्रेरित समाज को एक समरस, सुघटित और सुदृढ़ समाज के रूप में देखना चाहते थे। उनके सपनों के समर्थ भारत के पुनर्निर्माण तथा हिंदू समाज के पुनर्जागरण के लिए भी उनकी पुण्य तिथि के अवसर पर प्रति वर्ष आयोजन के माध्यम से प्रेरणा ग्रहण करते हैं।
गोरक्षपीठाधीश्वर ने बताया कि साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतर्गत समसामयिक विषयों पर आज से शुरू होने वाले सम्मेलन में जगद्गुरु रामानुजाचार्य, स्वामी वासुदेवाचार्य, श्यामदास महराज, स्वामी गोपाल, महंत सुरेशदास, महंत नारायण गिरी, स्वामी विद्या चैतन्य, महंत सुरेंद्रनाथ, डॉ. रामबिलास दास वेदांती, महंत शिवनाथ, राममिलनदास, महंत शांतिनाथ, महंत शेरनाथ, महंत बालकनाथ के अलावा देश भर से अनेक प्रतिष्ठित धर्माचार्य एवं भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री शामिल होंगे।