फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीएम का डीएम, एसएसपी से जवाब तलब

Wed, 07 Jun 2017 01:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
yogi adityanath - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
जनता दर्शन के साथ ही दफ्तरों में अफसरों के सुबह एक घंटा पहले आने और शाम को देर तक रुकने का भी कोई प्रभावी असर नहीं दिखाई पड़ रहा है। न तो शिकायतों की संख्या घट रही है और न ही मामलों के निस्तारण में ही तेजी दिखाई पड़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे गंभीरता से लिया है। जन शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा में सूबे के फिसड्डी मिले 10 जिलों के डीएम, एसएसपी से उन्होंने स्पष्टीकरण मांगा है। इनमें गोरखपुर के डीएम राजीव रौतेला और एसएसपी आरपी पांडेय के भी नाम शामिल हैं। सीएम ने मुख्य सचिव राहुल भटनागर को जन शिकायतों के निस्तारण की नियमित समीक्षा करते हुए लापरवाह अफसरों पर सख्ती के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन


गोरखपुर के अलावा जिन डीएम से स्पष्टीकरण मांगा गया है उनमें लखनऊ, नोएडा, कानपुर नगर, इलाहाबाद, सीतापुर, आगरा, जौनपुर, खीरी व हरदोई के डीएम शामिल हैं। इसी तरह यहां के एसएसपी के अलावा लखनऊ, हरदोई, खीरी, सीतापुर, बहराइच, जौनपुर, फिरोजाबाद तथा मैनपुरी के एसएसपी से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

12 अफसरों का रोका जा चुका है वेतन
जिले में मुख्यमंत्री संदर्भ, ऑनलाइन शिकायतें, तहसील और समाधान दिवस आदि के लंबित मामलों को लेकर डीएम ने पहले से सख्ती कर रखी है। पिछले महीने समीक्षा बैठक के दौरान लंबित मामलों की संख्या अधिक पाए जाने पर उन्होंने डीपीआरओ, जिला पूर्ति अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन, पीडी ग्राम्य विकास, पीओ डूडा समेत 12 अफसरों का वेतन रोक दिया था। सभी को लंबित मामले निपटाने के लिए तीन दिन की मोहलत दी थी। इनमें से ज्यादातर ने मामलों का निस्तारण कर डीएम को रिपोर्ट भी दे दी, मगर अब भी कुछ अफसर अपनी सुस्ती नहीं तोड़ पा रहे। कुछ को तो आनलाइन शिकायतें देखने और कंप्यूटर पर उनके निस्तारण की रिपोर्ट लगाना ही नहीं आता।
विज्ञापन


मंडल में 40 हजार राजस्व के मामले लंबित
जिले में सर्वाधिक शिकायतें जमीन के विवाद से जुड़ी आती हैं। जनता दर्शन हो, तहसील दिवस या फिर समाधान दिवस में दबंगों द्वारा जमीन पर कब्जा कर लेने, पट्टीदार, रिश्तेदार या गांव के किसी व्यक्ति द्वारा धोखा देकर औने-पौने दाम पर जमीन का बैनामा करा लेने जैसी शिकायतें ही सर्वाधिक रहती हैं। अफसर भी इनसे बचना चाहते हैं। शायद यही वजह है कि कमिश्नर, डीएम से लेकर एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार तक के कोर्ट में 40 हजार से अधिक राजस्व मामले लंबित हैं। जिले स्तर पर सुनवाई न होने पर तमाम फरियादी मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, राजस्व परिषद आदि में रजिस्टर्ड डाक या आनलाइन शिकायतें करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें