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मुख्यमंत्री के मंडल में बढ़ गई जमीन की डिमांड

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बदल रहा हैै, गोरखपुर
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विकास की बयार बही तो जमीन की मांग भी बढ़ी
प्रदेश में जमीन की खरीद-फरोख्त में गोरखपुर मंडल तीसरे पायदान पर
तीन महीने में रजिस्ट्री विभाग को स्टांप ड्यूटी से 136 करोड़ की आय
अरुण चन्द
गोरखपुर। एम्स, खाद कारखाना, दिल्ली, मुंबई समेत कई प्रमुख शहरों के लिए नियमित वायुसेवा, चौड़ी होती सड़कें, कुशीनगर में बनकर तैयार अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट समेत विभिन्न क्षेत्रों में हुए ढेरों विकासपरक काम की वजह से गोरखपुर मंडल में खरीदारों के बीच जमीन की मांग बढ़ गई है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में अब तक जमीन की खरीद-फरोख्त में गोरखपुर मंडल पूरे प्रदेश में तीसरे पायदान पर है। पहले स्थान पर चित्रकूट, दूसरे पर बरेली मंडल है। हालांकि इन दोनों मंडलों में जमीन की रजिस्ट्री से होने वाली आय का लक्ष्य गोरखपुर की तुलना में काफी कम है।
एआईजी स्टांप कमलेश शुक्ला के मुताबिक इस वित्त वर्ष में जमीन की रजिस्ट्री में लगने वाले स्टांप ड्यूटी से आय का लक्ष्य 929.65 करोड़ रुपये तय है। दो महीने में ही यानी 31 मई तक 136.92 करोड़ की आय हो चुकी है, जबकि इस बीच लोकसभा के चुनाव भी थे। वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष प्रतिशत में यह उपलब्धि 14.7 फीसदी है। वहीं चित्रकूट 18.1 फीसदी के साथ पहले और बरेली 15 फीसदी कमाई पूरी कर दूसरे नंबर पर है।
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रजिस्ट्री से होने वाली आय में मंडल का महराजगंज और कुशीनगर जिला सौ फीसदी लक्ष्य पूरा कर रहा है तो गोरखपुर और देवरिया 90 फीसदी से ऊपर हैं। जमीन की खरीद-फरोख्त में आई इस तेजी को देखते हुए ही विभाग ने अकेले गोरखपुर का ही लक्ष्य पिछले वित्तीय वर्ष के 455.94 करोड़ से बढ़ाकर 499.50 करोड़ कर दिया है। यानी पूरे मंडल के लक्ष्य का आधे से अधिक सिर्फ गोरखपुर जिले को दिया गया है।
लगातार तीसरे साल नहीं बढ़ेंगे गोरखपुर की जमीनों के दाम
गोरखपुर जिले में जमीन, मकान या दुकान खरीदने की प्लानिंग कर रहे लोगों के लिए राहत भरी सूचना है। यहां इस बार भी सर्किट रेट नहीं बढ़ाए जाएंगे। वहीं प्रदेश में कई अन्य जिलों में एक अगस्त से नया सर्किल रेट लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। हर साल सर्किल रेट रिवाइज किया जाता है और अमूमन दस फीसदी तक की बढ़ोत्तरी की जाती है। यह लगातार तीसरा ऐसा साल है जबकि जिला प्रशासन ने सर्किल रेट में बदलाव नहीं किया। तीन अगस्त 2016 को लागू सर्किल रेट के ही मुताबिक इस बार भी जमीन, मकान, दुकान आदि संपत्तियों की स्टांप ड्यूटी तय की जाएगी। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक योगी आदित्यनाथ के 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से जिले में विभिन्न परियोजनाएं शुरू हुईं हैं। इनमें अभी भी कुछ के लिए जमीन अधिगृहीत या काश्तकारों से समझौते के आधार पर ली जानी हैं। ऐसे में सर्किल रेट बढ़ा तो सरकार का नुकसान होगा।
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कोट
तीन जुलाई 2016 को लागू किए गए सर्किल रेट के बराबर ही अभी भी जिले की जमीनों का बाजारू मूल्य पाया गया है, जिसकी वजह से इस साल भी सर्किल रेट में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय किया गया है। - के. विजयेंद्र पांडियन, डीएम
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