मेडिकल कॉलेज में इंसिलेटर का चिमनी टूटने की वजह से परिसर में प्रदूषण फैल रहा है। इसके चलते महज दस फीट की ऊंचाई पर ही धुआं निकल रहा है। कूड़े को एकत्र करने के लिए आर्थो वार्ड के बाहर खाली जगह का इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां पर एक सप्ताह बायो मेडिकल वेस्ट एकत्र होने के बाद इसे अलग कर निस्तारण किया जाता है।
बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए मेडिकल कॉलेज में इंसिलेटर की व्यवस्था की गई है। मानक के अनुसार करीब 70 फीट ऊंची चिमनी होनी चाहिए। इसमें मानकों की अनदेखी की गई। करीब पंद्रह दिन पहले आंधी की वजह से चिमनी टूट गई है और दस फीट की ऊंचाई से ही धुआं निकलकर फैल रहा है। मेडिकल कॉलेज में इंसिलेटर तो लगा दिया गया है मगर कूड़ा घर नहीं बनाया गया है। इस वजह से वार्ड नंबर तीन के बाद परिसर में ही बायो मेडिकल वेस्ट को एकत्र किया जा रहा है। कूड़ा घर न होने की वजह से पहले से ही गंदगी फैली हुई थी, अब चिमनी टूटने से प्रदूषण फैल रहा है।
इसकी जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो उसे जल्द ठीक करा दिया जाएगा।
- डॉ. एके श्रीवास्तव, एसआईसी