मुख्य सचिव राहुल भटनागर, प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी समेत करीब आधा दर्जन प्रमुख सचिवों के गुरुवार को शहर आगमन को लेकर पुलिस और प्रशासनिक महकमा चौकन्ना हो गया है। बुधवार की देर रात तक पुलिस और प्रशासनिक महकमा तैयारियों में जुटा रहा। विकास कार्यों की प्रगति से जुड़ी रिपोर्ट की फाइलें लेकर मंडलीय अफसर संयुक्त विकास आयुक्त कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। सभी जिलों की रिपोर्ट को कंपाइल करने की जिम्मेदारी कमिश्नर अनिल कुमार ने संयुक्त विकास आयुक्त को ही सौंप रखी थी।
उधर, कलेक्ट्रेट में भी रेवन्यू रिकार्ड, तहसील दिवस आदि से जुड़े आंकड़ों को दुरुस्त करने की तैयारी चलती रही। नगर निगम सफाई में जुटा रहा तो जिला अस्पताल और मेडिकल कालेज प्रशासन इंसेफेलाइटिस वार्ड आदि की सफाई लगा रहा। लोक निर्माण विभाग सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत से जुड़ी फाइलें दुरुस्त करने में लगा था तो वहीं मुख्यमंत्री संदर्भ व शासन से आने वाले मामलों में हुई कार्रवाई की रिपोर्ट भी अपडेट की गई। मुख्य सचिव के साथ प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, प्रमुख सचिव लोनिवि के अलावा सभी प्रमुख सचिवों के स्टॉफ आफिसर भी रहेंगे।
मुख्य सचिव का कार्यक्रम
- सुबह 9.45 बजे एयरपोर्ट पहुंचेंगे
- सुबह 10 बजे एयरपोर्ट से मेडिकल कालेज निकलेंगे
- सुबह 10.20 से 11.15 तक मेडिकल कालेज का निरीक्षण
- सुबह 11.20 से 12 बजे तक पुलिस थाने पर मीटिंग
- दोपहर 12.15 बजे से सर्किट हाउस में जनप्रतिनिधियों से मुलाकात
- दोपहर 1 से 1.30 बजे तक नागरिकों से मुलाकात
- दोपहर 2.30 बजे से 4.30 बजे तक जीडीए में कानून व्यवस्था एवं विकास कार्यों की समीक्षा
- शाम 4.30 बज से 4.50 बजे तक मीडिया से बातचीत
- शाम 5 बजे लखनऊ रवाना हो जाएंगे
कमिश्नर सख्त, मरीजों को मिलेगी राहत
महीनों से जिला अस्पताल में एनीस्थिसिया डॉक्टर न होने की वजह से बढ़ी मरीजों की मुसीबत अब कम होगी। पत्राचार के बाद भी डॉक्टर की तैनाती न होने के मामले को कमिश्नर अनिल कुमार ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने एडी हेल्थ से वार्ता कर नाराजगी जाहिर की और तत्काल प्रभाव से एनीस्थिसिया डॉक्टर के तैनाती का आदेश जारी कर दिया।
बृहस्पतिवार को मुख्य सचिव को गोरखपुर आना है। इसके पहले कमिश्नर और डीएम स्वास्थ्य विभाग की कमियों को दूर करने में लगे हुए हैं।
बुधवार को सीएमओ को बुलाकर कमिश्नर ने जानकारी ली तो इस दौरान ही उन्हें जिला अस्पताल में एनीस्थिसिया डॉक्टर के न होने की वजह से मरीजों को हो रही परेशानी की भी जानकारी हुई। महीनों से जिला अस्पताल में एनीस्थिसिया के डॉक्टर नहीं है। एसआईसी प्रशासनिक काम छोड़कर ओटी में जाते हैं तभी ऑपरेशन हो पाता है। यह जानकारी होते ही कमिश्नर ने न सिर्फ एडी हेल्थ से वार्ता कर नाराजगी जताई बल्कि तत्काल प्रभाव से एक एनीस्थिसिया डॉक्टर तैनात करने का आदेश दिया। इसके पहले अस्पताल प्रशासन की ओर से इसे लेकर पत्र लिखा जा चुका है, चूंकि मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी मेडिकल आफिसर के पद पर दो एनीस्थिसिया के डॉक्टर मौजूद है, जिन्हें भेजने के लिए एडी हेल्थ के आदेश की जरूरत है।