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स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करें, बजट की कमी नहीं

Thu, 29 Sep 2016 09:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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मेडिकल कालेज में इंसेफेलाइटिस वार्ड का निरीक्षण करते मुख्य सचिव राहुल भटनागर। - फोटो : Shivharsh Dwivedi
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मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने कहा कि 15-20 सालों से इंसेफेलाइटिस का सटीक उपचार न खोज पाना चिंता की बात है। यह वास्तव में इस क्षेत्र की गंभीर समस्या है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर कर रही है। इस मद में बजट की कोई कमी नहीं है। मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि बुखार होने पर मरीज साधारण चिकित्सकों को दिखाते हैं, जो ठीक नहीं है। इस बीमारी के लक्षण, बचाव और सावधानी के बारे में व्यापक पैमाने पर प्रचार-प्रसार होना चाहिए।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अगर कहीं डॉक्टर नहीं हैं, उपकरणों के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं तो इसका इंतजाम किया जाए। बजट की चिंता न कर अत्याधुनिक मशीनें मंगाईं जाएं। डॉक्टर नियुक्त किए जाएं। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेंटर की संख्या बढ़ाने के लिए कॉलेज प्रबंधन को निर्देश दिया गया है। एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्य सचिव ने कहा कि पीएचसी और सीएचसी पर स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई जाएं ताकि वहां भी मरीजों का बेहतर इलाज हो सके। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर बढ़िया काम कर रहे हैं। निरीक्षण दौरान कहीं कोई कमी नहीं मिली। मरीजों से पूछा, इलाज ठीक से हो रहा है या नहीं मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने गुरुवार को मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सौ बेड के इंसेफेलाइटिस वार्ड में मरीजों और तीमारदारों से इलाज के बारे में पूछताछ की। मेडिकल कालेज पहुंचते ही मुख्य सचिव सीधे इंसेफेलाइटिस वार्ड में गए। वहां उन्होंने मरीजों से पूछा, कहां से आए हैं? कितने दिनों से भर्ती हैं? इलाज ठीक से हो रहा है अथवा नहीं।

निरीक्षण के दौरान बाल रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. महिमा मित्तल ने उन्हें चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के बारे में बताया। इसके बाद वह कॉलेज परिसर में 275 करोड़ की लागत से बन रहे 500 बेड के बाल रोग संस्थान का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां उन्होंने बताया कि संस्थान के लिए 74 फीसदी भुगतान कर दिया गया है। जल्द ही मुख्यमंत्री इसका उद्घाटन करेंगे। इसके बाद मुख्य सचिव भटनागर ने प्राचार्य, बाल रोग विभाग की अध्यक्ष, वरिष्ठ चिकित्सकों, एडी हेल्थ, सीएमओ आदि के साथ बैठक की। इस दौरान डीएम डॉ. संध्या तिवारी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। मेडिकल कॉलेज में तीन बच्चों की मौत मुख्य सचिव राहुल भटनागर के निरीक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज में तीन बच्चों की मौत होे गई। मुख्य सचिव सबसे पहले आईसीयू में गए थे और मरीजों का हाल जान रहे थे। वह जब बेड नं. 26 पर भर्ती शमां परवीन का हाल जानने के बाद बेड 27 की तरफ बढ़े तो डॉक्टरों ने मरीज की हालत नाजुक बताते हुए उन्हें आगे बढ़ा दिया। उस बेड पर गगहा निवासी चार वर्षीय मासूम संजीव कुमार भर्ती था, जिसकी करीब 11 बजे मौत हो चुकी थी। मासूम के तीमारदारों को भी डॉक्टरों ने वार्ड से हटा दिया। इसके अलावा देवरिया के बनकटा निवासी दिव्यांशु की मौत भी करीब साढ़े दस बजे हो गई। इससे कुछ देर पहले देवरिया के रुद्रपुर की मनीषा ने भी दम तोड़ दिया। उसका भी शव बेड पर पड़ा रहा। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में मरीज की मौत होना और ठीक होना आम बात है।
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