फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घर की गुल्लक भी खाली होने लगी

Mon, 25 Apr 2016 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
बैंक रोड एसबीआई एटीएम पर पैसा‌ निकालने के लिए लगी लाइन। - फोटो : shivharsh
विज्ञापन
एटीएम में करेंसी की कमी दूर होने का नाम नहीं ले रही है। जिस भी एटीएम में जाओ, सभी में ‘रुपये नहीं हैं’ की तख्ती टंगी दिखाई पड़ रही है। जरूरतमंद एक से दूसरे एटीएम का चक्कर लगा रहे हैं। कुछ लोग जहां उधार लेकर काम चला रहे हैं और वहीं कुछ के घरों में सहारा बनी गुल्लक भी अब खाली होने लगी है। आश्चर्य तो यह है कि बैंक अफसर यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि रकम की किल्लत कब दूर होगी।
विज्ञापन


एक सप्ताह से शहर के अधिकांश एटीएम खाली पड़े हैं। बैंकों को आरबीआई से मांग के अनुरूप करेंसी नहीं मिल पा रही है। मांग की अपेक्षा 15 से 20 प्रतिशत रकम ही मिल पाने से एटीएम भरे नहीं जा रहे हैं। जिन एटीएम में रुपये डाले भी जा रहे हैं वो कुछ ही देर में खाली हो जा रहे हैं। शहर के अधिकांश एटीएम बंद पड़े हैं और जिनमें रुपये थे, वहां ग्राहकों की लंबी कतार लगी दिखी। 

बेटे की गुल्लक से काम चला रहा
कई दिनों से एटीएम से खाली हाथ लौट रहा हूं। पहले तो घर में रखे पैसे से जरूरत के काम पूरे किए। सोचा एक-दो दिन में रुपये निकाल लूंगा, लेकिन एटीएम खाली ही हैं। अब तो बच्चे की गुल्लक से काम चला रहा हूं। 
विज्ञापन

- शैलेश पांडेय

पत्नी से रुपये लेकर ले आया सामान
कई दिनों से एटीएम से रकम नहीं मिल पा रही। पत्नी ने अपने पास जो रुपये जुटा रखे थे, उसी से घर के जरूरी सामान खरीदे। पांच दिन हो गए, एटीएम का चक्कर लगाकर लौट आ रहा हूं। एक दो एटीएम से रकम मिलने की सूचना पर वहां भी गया, लेकिन लंबी कतार देखकर लौट आया।
- अवध किशोर

घर में जमा किए पैसे काम आ रहे
एक सप्ताह से पैसे के लिए एटीएम और बैंक के चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन रोज खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। घर में जरूरी काम के लिए रखे पैसे से काम चला रहा हूं, लेकिन यह स्थिति कुछ दिन और चली तो दिक्कत बढ़ जाएगी।
मनीषा पांडेय, 

अपनी रकम नहीं निकाल पा रही 
अपना पैसा निकालने के लिए लगातार दौड़-भाग करनी पड़ रही है। एक से दूसरे एटीएम दौड़ रही हूं पर रकम नहीं मिल पा रही। हाथ खाली हो गए हैं। एकाउंट में रुपये होते हुए भी दूसरों के आगे हाथ फैलाने की नौबत न आ जाए। 
विज्ञापन

- सुनीता गुप्ता 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें