अधिकतर एटीएम रकम के अभाव में बंद हैं।
- फोटो : rajesh
बडे़ नोटों की बंदी के 49वें दिन भी करेंसी की किल्लत पूरी तरह से दूर नहीं हो सकी है। अब भी एटीएम में करेंसी की किल्लत से अधिकांश एटीएम के शटर गिरे रह रहे हैं या फिर नो कैश का बोर्ड लगा रहता है और जिस एटीएम से कैश निकल भी रहा है उनसे ढाई हजार की निकासी बेमानी है।
मंगलवार को भी शहर के सभी बैंकों में लोगों की कतारें लगी रहीं। पिछले 10 दिनों के अंदर रिजर्व बैंक द्वारा काफी मात्रा में करेंसी उपलब्ध कराए जाने से बैंकों में कैश का संकट कुछ हद तक कम हो गया है। ऐसे में बैंकों में सुबह से भीड़ लगी रही और बैंकों ने अपने खाताधारकों को 24 हजार रुपये तक भुगतान किया, लेकिन शहर के अधिकांश एटीएम की स्थिति खराब रही। मंगलवार को भी रुस्तमपुर, मोहद्दीपुर, नौसड़, बेतियाहाता, कूड़ाघाट, हड़हवा फाटक, गोरखनाथ समेत शहर के अधिकांश इलाकों में एटीएम के शटर गिरे रहे। हालांकि एक बार फिर बैंक रोड के सभी एटीएम पर न सिर्फ लोगों की भीड़ लगी रही बल्कि लोग कैश निकालने में कामयाब भी रहे। वहीं जिन इलाकों के एटीएम में कैश मिल भी रहे थे, उनसे लोगों को मात्र 2000 रुपये ही मिल रहे थे। एसबीआई के एटीएम प्रभारी आरसी दुबे ने कहा 100 के नए नोटों की किल्लत से एटीएम में सिर्फ दो हजार रुपये के नोट डाले जा रहे हैं।
नहीं मिल रहे त्र 2500
गोरखपुर। नोटबंदी के दौरान आरबीआई से काफी संख्या में ऐसे नोट बैंकों को भेज दिए गए थे, जिनको बैंकों ने रद्दी करार कर आरबीआई को वापस कर दिया था। ऐसे नोट एटीएम के लिए मुफीद नहीं होते हैं। एटीएम ऐसे नोटों को सही ढंग से बाहर नहीं निकाल पाता है। एटीएम प्रभारी आरसी दुबे का कहना है कि ऐसे में अगर 100 वाले पुराने नोट डाल दिए जाएं तो एटीएम हैंग हो सकते हैं। इससे अभी एटीएम में सिर्फ 2000 वाले नोट डाले जा रहे हैं।