विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों की तस्वीर काफी पहले ही साफ कर देेने वाली बसपा के क्षत्रप गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में उलझकर रह गए हैं। अल्पसंख्यक वोटरों के भरोसे चुनावी मैदान में ताल ठोकने की तैयारी पर विराम लगाते हुए पार्टी के क्षत्रप मजबूत प्रत्याशी की तलाश में जुटे हैं। सूत्रों की माने तो पार्टी किसी मजबूत ब्राह्मण चेहरा पर दांव लगा सकती है। 28 को आजमगढ़ में होने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती की रैली के पहले प्रत्याशी की घोषणा की जा सकती है।
परिसीमन के बाद वर्ष 2012 में पहली बार अस्तित्व में आए गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले पूर्व मंत्री राम भुआल निषाद ने भाजपा का दामन थाम लिया। वहीं जिला पंचायत चुनाव में अपने भाई को निर्दल प्रत्याशी बनाकर पार्टी का सहयोग लेने वाले भाजपा विधायक विजय बहादुर यादव के सपा प्रत्याशी बनने के बाद उनके नाम पर भी विराम लग चुका है। पिछले दिनों पार्टी की लोकल बॉडी और प्रदेश नेतृत्व से चार-पांच नामों पर चर्चा तेज थी। जिसमें पार्टी से जुड़े एक मुस्लिम नेता की पत्नी पर आम सहमति बनने लगी थी। लेकिन बाद में उनके नाम पर रायशुमारी नहीं बन पाई। राजनीतिक समीकरण को देखते हुए अब पार्टी किसी ब्राह्मण चेहरा को मैदान में लाने की तैयारी में है।
सूत्रों की माने तो पार्टी से जुड़े एक पूर्व छात्रनेता की पैरवी भी तेजी से चल रही है। इसके अलावा कुछ और लोग बड़े नेताओं के संपर्क में हैं। हालांकि इस सप्ताह ही तस्वीर साफ हो सकती है क्योंकि 28 अगस्त को आजमगढ़ की रैली के पहले पार्टी क्षत्रप प्रत्याशी का चयन कर लेना चाहते हैं। समझा जा रहा है कि एक दो दिन में बसपा सुप्रीमो से इस मामले को लेकर पार्टी के नेताओं की बातचीत हो सकती है।