मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जन के नाम का इस्तेमाल कर केमिस्ट शॉप पर मरीजों को ठगे जाने का मामला पकड़ में आया है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधा के नाम पर बहलाकर एक केमिस्ट शॉप पर ले जाया जाता है, जहां एक पर्चे पर दवाएं लिखकर मरीजों से फीस वसूली जा रही है, जबकि डॉक्टर उस शॉप से किसी भी तरह का संबंध होने से इन्कार कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आने के बाद कई मरीजों ने इसकी शिकायत की है। कई मरीज शिकायत लेकर एसआईसी के पास भी पहुंचे थे।
मरीजों की मानें तो मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आने के बाद दलाल उन्हें बिना लाइन के बेहतर सुविधा देने के नाम पर बाहर ले जाते हैं, जहां तीन सौ रुपये फीस वसूली जाती है और दवाएं हमेशा हजार रुपये से ज्यादा की होती है। मेडिकल कॉलेज में दलालों का होना कोई नई बात नहीं है। वैसे तो पहले डॉक्टर पर ही इनसे सांठगांठ के आरोप लगते रहे हैं लेकिन पहली बार कोई डॉक्टर दलालों से परेशान हुआ है। इस नए खेल के चक्कर में मरीजों की परेशानी बढ़ती जा रही है। कम खर्च में बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों का ठगी का शिकार होकर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।
मैं मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में एक महीने पहले आई थी। बाहर मिले एक व्यक्ति ने कहा कि डॉक्टर साहब बाहर भी देखते हैं। 300 रुपये फीस है, आसानी से इलाज हो जाएगा। वहां जाने के बाद फीस के अलावा 1200 रुपये की दवा भी खरीदी, मगर फायदा नहीं हुआ तो अस्पताल में ही आकर दिखाई। तब पता चला कि इसके पहले जिसे देखाया था, वह डॉक्टर नहीं थे।
- श्यामा देवी, कैंपियरगंज
मेरा एक पैर ठीक से उठता नहीं। इसे दिखाने के लिए ओपीडी की लाइन में लगा था तो एक व्यक्ति ने पास आकर कहा चलो बाहर दिखा दें। यही डॉक्टर साहब आधे घंटे बाद वहां पर भी देखेंगे। मैं उसकी बातों में आ गया और रिक्शे से थोड़ी दूर ले गया। वहां पर डॉक्टर नहीं मिले तो मैं समझ गया, क्योंकि मैं लंबे समय से यहीं पर इलाज करा रहा हूं और दोनों ही डॉक्टरोें को पहचानता हूं।
- विश्वकर्मा सिंह, हाटा, कुशीनगर