विभागाध्यक्ष व मेडिकल कॉलेज प्रशासन के विरोध में की नारेबाजी, निकाला जुलूस
गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज के साथी जूनियर डॉक्टर की मौत से आक्रोशित छात्रों ने मेडिकल प्रशासन और विभागाध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी की। जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी के विभागाध्यक्ष और अन्य डाक्टरों की ओर से लगातार उत्पीड़न किया जाता है। यही कारण है कि आए दिन मरीज के तीमारदारों संग मारपीट की घटनाएं होती रहती हैं। उच्चाधिकारियों से शिकायत करने पर अनसुना कर दिया जाता है।
बृहस्पतिवार शाम को मेडिकल कॉलेज परिसर में जूनियर डॉक्टरों ने कैंडल मार्च निकाला। साथी डॉक्टर विनीत जायसवाल की आत्महत्या का जिम्मेदार मेडिकल प्रशासन को बताते हुए नारेबाजी की। डॉक्टर विनीत के पिता विजया नायर भी परिसर में मौजूद थे। उन्होंने भी अस्पताल प्रशासन और सीनियर डॉक्टरों के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने विभागाध्यक्ष व सीनियर डॉक्टरों के खिलाफ गुलहरिया थाने में तहरीर देने की बात भी कही। बोले, संभव है अन्य लोग इससे सबक लेंगे। जैसे उनके बेटे की मौत हुई किसी और के बेटा को परिस्थिति में मजबूर होकर ऐसा कदम न उठाना पड़े।
‘बिना खाए, सोए बेटा लगातार निभाता था जिम्मेदारी’
डॉक्टर विनीत के पिता विजया नायर कहा कि मई 2019 में मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने के बाद दो ढाई महीने सब अच्छा चला। 25 जुलाई से 31 जुलाई तक इमरजेंसी में उसकी ड्यूटी लगा दी गई। इस दौरान बिना खाए सोए ही घंटों बेटा अपनी जिम्मेदारी निभाता था। बेटे के बताने के बाद मैने खुद विभागाध्यक्ष से मिलकर बात की। लेकिन कोई हल नहीं निकला पहले की तरह की परेशान किया जाना जारी रहा। एक अगस्त को वह नेपाल चला गया था जिसकी गुमशुदगी भी गुलरिहा थाने मे दर्ज कराई थी। 6 अगस्त को खुद से ही वापस आ गया। उसके बाद मुंबई में बेटे को साइकेट्रिस्ट ( मनोचिकित्सक) को दिखाया। उन्होंने बताया कि ज्यादा काम के बोझ के कारण डिप्रेशन में आ रहा है। लगातार हो रहे उत्पीड़न के बाद वह पूरी तरह टूट गया था। दोबारा उसकी ड्यूटी इमरजेंसी में लगा दी गई। इस वजह से बिना बताए नेपाल चला गया और वहां उसने आत्महत्या कर ली।