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उत्साह से किया महादान

Wed, 15 Jun 2016 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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जिला अस्पताल में लगाए गए शिविर में रक्तदान करते रक्तदाता। - फोटो : amar ujala
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स्वैच्छिक रक्तदाता दिवस पर ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ की ओर से जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में आयोजित रक्तदान शिविर में 109 लोगों ने रक्तदान करके न सिर्फ इंसानियत का फर्ज निभाया बल्कि महादानी भी बने।
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मंगलवार को सुबह आठ बजे शुरू हुआ रक्तदान का सिलसिला अपराह्न तीन बजे तक चला। तीखी धूप भी रक्तदाताओं के जज्बे को नहीं रोक सकी। रक्तदान करने वालों को भीड़ लगातार बनी रही। पहली दफा खून देने आए लोगों का उत्साह देखने लायक था। रक्तदान के लिए तमाम तरह की भ्रांतियों को लेकर उनके माथे पर न शिकन था और न ही भय। इनमें युवाओं की तादाद अधिक रही। महिलाएं भी खून देने में पीछे नहीं रहीं। सभी ने पूरे उत्साह के साथ रक्तदान कर दूसरों की जिंदगी बचाने का संकल्प लिया।

प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ एचआर यादव ने शिविर का उद्घाटन किया और रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र देकर उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने खून के अभाव में दम तोड़ती जिंदगियों को बचाने के लिए आगे आए लोगों की तारीफ की। उनके साथ डॉ अंबुज श्रीवास्तव भी थे।
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मरीज को तड़पता देखा तो खून की अहमियत समझ में आई। अब तो मैं नियमित रूप से रक्तदान करने लगा। कई बार रक्तदान कर चुका हूं। 
- अरविंद गुप्ता
 
मित्र के पिता की जरूरत पर 18 साल पहले पहली बार रक्तदान किया था। उसके बाद तो समय-समय पर रक्तदान कर रहा हूं।
- वीरचंद्र

पहली बार रक्तदान किया। पहले इसे लेकर मेरे मन में कई भ्रांतियां थीं, मगर आज रक्तदान करने के बाद सारी भ्रांतियां भी दूर हो गईं।
- संजय कुमार भारतीय

लोगों को खून की जरूरत अक्सर हो जाती है। यह सोचने के बाद से ही मैैं रक्तदान करने लगा। मैंने आज पांचवीं बार रक्तदान किया।
- शिवम मद्देशिया

खुद की इच्छा से रक्तदान करता आया हूं। यह नेक काम है। मुझे बेहद अच्छा लगता है। इससे पहले आठ बार रक्तदान कर चुका हूं। 
-अरुण यादव

दूसरों को रक्तदान करता देख मेरी भी इच्छा हुई। अब मैं भी नियमित तौर पर में रक्तदान करता रहता हूं ताकि मेरा खून किसी के काम आ सके।
- सोनू मद्देशिया

एक रिश्तेदार को खून की जरूरत पड़ी तो रक्तदान किया। उसके बाद इसकी अहमियत समझ में आ गई। तबसे नियमित रक्तदान करता हूं।
- राजाराम यादव

दूसरों की जान बचाने का इससे बेहतर कोई दूसरा रास्ता नहीं। यही वजह है कि जब भी किसी को जरूरत होती है रक्तदान करता हूं।
- आलोक राय

रक्तदान की अहमियत मैंने अपने एक करीबी दोस्त से समझी। उसे परेशान देखा तब से मन बना लिया कि मैं भी रक्तदान करूंगा।
- विपिन कुमार यादव

रक्तदान करने के बाद अलग सा सुकून मिलता है। मैं नियमित तौर पर हर तीन महीने के बाद रक्तदान करता रहता हूं।
- कामेश यादव

काफी पहले दूसरों को रक्तदान करता देख मेरे भी मन में रक्तदान की इच्छा जगी थी। मैं अब तक 29 बार रक्तदान कर चुका हूं।
- हरिश्चंद्र श्रीवास्तव

दूसरों की मदद कहां कोई कर पाता है। रक्तदान करने से जहां आदमी खुद को स्वस्थ रखता है वहीं दूसरों की भी मदद हो जाती है।
- महेश कुमार
 
शरीर को रक्तदान से कोई नुकसान नहीं होता है, इसकी जानकारी होने के बाद से ही मैं नियमित तौर पर रक्तदान करने लगा।
- अनुराग राम त्रिपाठी

मैं नियमित तौर पर रक्तदान करता रहता हूं। इससे मुझे कभी कोई दिक्कत नहीं महसूस होती है। मैं तो दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करता हूं।
- रामशृंगार

मैं बहुत दिनों से रक्तदान करने की सोच रहा था, लेकिन कर नहीं पा रहा था। आज सुबह कैंप की जानकारी हुई तो सब काम छोड़कर चला आया।
- शंखभर यादव

मैं बहुत दिनों से रक्तदान के बारे में सोच रहा था। लेकिन नहीं कर पा रहा था। आज सुबह कैंप की जानकारी हुई तो सब काम छोड़कर आया।
- उपेंद्र पटेल

मेरी जब उम्र कम थी तब भी रक्तदान करने की इच्छा थी, लेकिन नहीं कर पाती थी। 18 साल की होने के बाद से बराबर रक्तदान कर रही हूं।
- अर्चना मिश्रा

रक्तदान से बड़ा कोई सहयोग हो ही नहीं सकता। जरूरत पर आप किसी दूसरे के काम आ सकें, यही तो इंसानियत है।
- मीरा पांडेय

मन में संतोष है कि मेरा खून किसी के काम आएगा। इसी सोच से रक्तदान करती रहती हूं। कई बार रक्तदान कर चुकी हूं।
- शैलेजा कुशवाहा
 
अपने लिए तो सब जीते हैं, दूसरों के लिए कुछ करना ही इंसानियत है। इसी सोच से रक्तदान की शुरुआत की और नियमित रक्तदाता बन गया।
- राजेश दुबे

नेकी में रोजा बाधक नहीं
मैं रोजा रख रहा हूं, मगर जैसे ही मुझे रक्तदान कैंप की जानकारी हुई, मैं चला आया। रमजान के पाक महीने में नेक काम किए जाते हैं। इससे ज्यादा नेक काम कुछ नहीं हो सकता। खुदा ने जो जिंदगी दी है वह खुद के ही काम आए तो फिर जीने का क्या मतलब है। जो जिंदगी मुझे मिली है वह मेरे साथ ही न खत्म हो जाए, इसी सोच के साथ में नियमित रूप से रक्तदान करता हूं। जब भी मुझे मौका मिलता है मैं पीछे नहीं हटता। रक्तदान करता हूं। इससे पहले मैं लखनऊ पीजीआई में भी रक्तदान कर चुका हूं। उपवास से रक्तदान का कोई वास्ता नहीं है। इससे मुझे कोई परेशानी नहीं होती।
- इरशाद अहमद, रोजेदार

इनका रहा विशेष सहयोग
रक्तदान शिविर में ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. केएम सिंह, संजय, शमीम सिद्दीकी, प्रमोद कुमार, शेष कुमार चंद्रभान, महेंद्र प्रताप सिंह यादव, उमेश चंद्र, दयाशंकर तिवारी, तेज प्रताप तिवारी, नीतीशा, श्वेता यादव, ब्रह्मा सिंह आदि का विशेष सहयोग रहा।
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