भाजपा सांसद कमलेश पर दर्ज केस की विवेचना विजिलेंस से कराने की हरी झंडी
गोरखपुर। भाजपा सांसद कमलेश पासवान, उनके कारोबारी पार्टनर सतीश नांगलिया समेत पांच लोगों पर दर्ज जालसाजी के केस की विवेचना विजिलेंस या भ्रष्टाचार निवारण से कराए जाने की मांग को गोरखपुर पुलिस ने हरी झंडी दे दी है। एसएसपी डॉ. सुनील गुप्ता ने मुख्यमंत्री कार्यालय के अनु सचिव अजय कुमार ओझा को पत्र के जरिए अनापत्ति रिपोर्ट से अवगत करा दिया है। दूसरी तरफ, सोमवार को पीड़ित (वादी मुकदमा) नरेंद्र प्रताप सिंह के बेटे गोलघर निवासी विवेक कुमार सिंह ने गोरखनाथ मंदिर जाकर जनता दरबार में शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि सांसद के दबाव में इस प्रकरण में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है, जबकि 90 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का नियम है। उन्होंने विवेचना गोरखपुर के बाहर से कराने की मांग भी की है।
मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में दिए गए प्रार्थना पत्र के मुताबिक कैंट थाने में अपराध संख्या (1041/2018) के तहत सांसद समेत पांच लोगों पर जालसाजी, आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया। 29 अप्रैल 2019 को मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र देने के बाद जांच शुरू हुई और एसएसपी को कार्रवाई करने के लिए आदेश दिया गया, क्योंकि विजिलेंस या भ्रष्टाचार अधिनियम में स्थानांतरित करने का अधिकार नहीं होने की वजह से अनापत्ति रिपोर्ट लगा दी। ताकि केस स्थानांतरित हो सके। फिर 11 जून को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करने पर एसएसपी ने सीओ कैंट को जांच दी और रिपोर्ट लगाई गई कि आपत्ति नहीं है जांच कोई भी एजेंसी करें। मगर आज तक फाइल नहीं भेजी गई। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रमुख सचिव गृह को निर्देशित कर जांच विजिलेंस या भ्रष्टाचार अधिनियम से कराई जाए।
यह है मामला
8 दिसंबर 2018 को कैंट थाने में फर्जी दस्तावेज के सहारे गोलघर स्थित बलदेव प्लाजा की जमीन रजिस्ट्री कराने की शिकायत पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर बांसगांव से भाजपा सांसद कमलेश पासवान, उनके कारोबारी पार्टनर सतीश नांगलिया, सुधा प्रसाद, कौस्तुभ प्रसाद और कंदर्प प्रसाद पर जालसाजी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। आरोप था कि नई दिल्ली के नीतिबाग निवासी योगेश्वर प्रसाद की पत्नी सुधा प्रसाद और उनके बेटे कौस्तुभ प्रसाद व कंदर्प प्रसाद ने फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज के सहारे जमीन अपने नाम करानी चाही, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। 21 अप्रैल 1999 को तत्कालीन एसडीएम सदर मुकेश कुमार मेश्राम द्वारा की गई जांच में भी भूखंड का स्वामी नरेंद्र के पिता स्व. फुद्दी सिंह को ही पाया गया। इसके बावजूद तीनों लोगों ने खुद को मालिक दर्शाते हुए उसे बेचने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि कृष्णा डेवलपर्स फर्म के पार्टनर मेडिकल कालेज जेमिनी रेजीडेंस निवासी सतीश नांगलिया और उनके दूसरे पार्टनर मेडिकल कालेज के उत्तरी गेट स्थित पासवान भवन निवासी कमलेश पासवान द्वारा जानबूझकर कूटरचित और फर्जी दस्तावेज के सहारे जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई।