sharad tripathi and rakesh singh baghel
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बीते छह मार्च को जिला योजना की बैठक के दौरान सांसद शरद त्रिपाठी और विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच हुई जूतम पैजार मामले में संगठन अब तक कोई निर्णय नहीं ले पाया है। चुनाव की घोषणा के बाद बीजेपी की तरफ से सांसद शरद त्रिपाठी ही उम्मीदवार होंगे या फिर कोई नया चेहरा आएगा इसको लेकर भी कयासबाजी चल रही है। परंतु इस मामले में सोशल मीडिया के महारथी बहुत आगे हैं। वे हर दिन नए नाम चुनावी चर्चा में शामिल कर रहे हैं। हालांकि सुबह तय हुए नाम रात तक बदल भी जा रहे हैं।
सांसद शरद त्रिपाठी व विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच हुई जूतम पैजार के बाद प्रदेश अध्यक्ष ने जितनी तेजी दिखाई और दोनों नेताओं को लखनऊ बुलाया उससे ऐसा लगा कि संगठन छवि बचाने के लिए सख्त निर्णय लेगा लेकिन जैसे-जैसे दिन बीत रहा है लोग मानने लगे हैं कि अब जल्दी ही शीर्ष नेतृत्व दोनों को एक साथ खड़ा करके समझौते का दावा करेगा। इन सबके बीच सोशल मीडिया पर विश्वस्त सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि भाजपा यहां उम्मीदवार बदलने जा रही है। नए नामों में भाजपा के एक पूर्व सांसद व एक विधायक के अलावा दूसरे दल के एक वरिष्ठ नेता का भी नाम खूब उछाला जा रहा है। दावे तो ऐसे किए जा रहे हैं जैसे शीर्ष नेतृत्व ने लगभग नाम फाइनल ही कर दिया हो। जैसे ही कोई नया नाम ब्रेक किया जा रहा है वैसे ही उन नेताओं के समर्थकों की धड़कन बढ़ जा रही है और वे उस पोस्ट पर अपने कमेंट के साथ धड़ाधड़ शेयर करना शुरू कर दे रहे हैं।
...चर्चा में आने के लिए उछलवा रहे नाम
सोशल मीडिया पर सुबह मजबूती के साथ उभर रहे उम्मीदवार शाम होते-होते किनारे हो जा रहे हैं। सोशल मीडिया के ये धुरंधर शरद त्रिपाठी को कभी देवरिया तो कभी बहराइच से टिकट दे रहे हैं। वहीं जिन लोगों को यहां टिकट दे रहे हैं उन्हें शाम तक खुद ही मुकाबले से बाहर भी कर दे रहे हैं। उम्मीदवारों को इस बार-बार बदलती लिस्ट पर लोग भी मजे ले रहे हैं। लोगों का कहना है कि ये लोग चर्चा में आने के लिए अपना नाम उछलवा रहे हैं।
जल्दी हो जाएगा निर्णय : सेतवान
जूता कांड पर संगठन के निर्णय व टिकट के सवाल पर भाजपा जिलाध्यक्ष सेतवान राय का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोग अपने मन से उम्मीदवारों का नाम जारी कर रहे हैं। संगठन के स्तर पर अभी ऐसा कुछ भी नहीं है। उम्मीदवार केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा। सांसद-विधायक प्रकरण पर भी शीर्ष नेतृत्व जल्दी ही निर्णय लेगा। भाजपा कार्यकर्ता अपने संगठन के पदाधिकारियों पर पूरा भरोसा करते हैं।