प्रेमचंद पार्क के सामने तत्कालीन अपर आयुक्त द्वारा जबरन लगाई गई प्रेमचंद की ऐतिहासिक प्रतिमा पर पिछले ढाई साल से पड़ा पर्दा उनकी जयंती के अवसर पर हटा दिया गया। प्रतिमा का यह अनौपचारिक अनावरण चित्रगुप्त मंदिर सभा के सदस्यों ने किया। लंबे समय से इसे लेकर चल रही कवायद से आजिज होकर सभा के लोगों ने पर्दा भले ही हटा दिया लेकिन प्रशासन से इसके औपचारिक अनावरण की मांग भी की।
सभा के अध्यक्ष अजय कुमार श्रीवास्तव अतुल के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम के पहले चरण में सुबह प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। दूसरे चरण में शाम को संगोष्ठी आयोजित हुई। इसमें वक्ताओं ने साहित्य जगत को प्रेमचंद के योगदान को याद किया। संगोष्ठी के बाद ‘इप्टा’ ने डॉ. मुमताज खान के निर्देशन में प्रेमचंद की कृति ‘सौत’ पर आधारित नाटक का मंचन किया गया, जिसे रीना श्रीवास्तव, सोनी निगम, प्रियंका, रफत हुसैन ने अपने बेहतरीन अभिनय से जीवंत कर दिया। इस दौरान पूर्वांचल बैंक के चेयरमैन एके सिन्हा सभा के स्वर्ण जयंती वर्ष पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया। इस मौके पर कमलकांत श्रीवास्तव, प्रेेम प्रकाश, अजय कुमार श्रीवास्तव, सती कुमार वर्मा, राकेश, संजय वर्मा, अखिलेंदु श्रीवास्तव, आलोक आदि मौजूद रहे।
कहानी पाठ और नाटक से याद किए गए मुंशी जी
प्रेमचंद साहित्य संस्थान ने प्रेमचंद पार्क में रविवार को कथाकार रवि राय की कहानी ‘गीशा’ का पाठ किया और प्रेमचंद की दो कहानियों ‘सौत’ और ‘पूस की रात’ पर आधारित नाटक का मंचन कर उन्हें याद किया। कार्यक्रम की शुरुआत साहित्यकार मदन मोहन, देवेंद्र आर्य, कपिलदेव, प्रमोद कुमार, रवि राय, राजाराम चौधरी, मनोज कुमार सिंह, लाल बहादुर, डॉ. मुमताज खान द्वारा प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। उसके बाद रवि राय ने अपनी कहानी ‘गीशा’ सुनाई। यह कहानी एक ऐसे परिवार के इर्द गिर्द घूमती है, जिसके बच्चे तो कुतिया पालने के शौकीन हैं, जबकि मुखिया इसके विरोधी। दोनों पक्षों के बीच इसे लेकर होने वाली जद्दोजहद को कहानी के जरिए पेशगी को मौजूद कथाकारों ने खूब सराहा।
कथाकार मदन मोहन ने कहा कि इंसान का जीवन जानवरों से भी बदतर होता जा रहा है, जिसकी चिंता किसी को नहीं है। ऐसे में साहित्य से ही इसकी चिंता की उम्मीद है। कवि देवेंद्र आर्य ने कहानी के मनोविज्ञान पर चर्चा की। आलोचक कपिलदेव, फिल्कार प्रदीप सुविज्ञ, पंकज मिश्र, अशोक चौधरी, आनंद पांडेय, जगदीश लाल, प्रमोद कुमार और प्रो. अशोक सक्सेना ने भी कहानी की सराहना की। संचालन संस्थान के सचिव मनोज कुमार सिंह ने किया।
इसके बाद पहले इप्टा ने कहानी ‘सौत’ पर आधारित नाटक का मंचन किया। उसके बाद अलख कला समूह ने ‘पूस की रास’ कहानी का मंचन किया। नीरज विश्वकर्मा के एकल अभिनय से प्रस्तुत इस नाटक को खूब सराहा गया। प्रस्तुति सहयोग गुड्डू यादव, राधा और जंजीर सिंह नाट्य रुपांतरण और निर्देशन बैजनाथ मिश्र का रहा।
‘शोषित समाज के मसीहा थे प्रेमचंद’
वरदा आर्ट इंस्टीट्यूट ने प्रेमचंद जयंती पर सूर्यकुंड सरोवर परिसर में संगोष्ठी आयोजित की। संस्था की निदेशक रीना जायसवाल ने कहा कि गरीबों की दशा और शोषण को मुंशी जी ने जिस तरह अपनी कृतियों में उजागर किया, उससे यह कहने में किसी को गुरेज नहीं होगा कि वे शोषित समाज के मसीहा थे। एके सिंह ने ईदगाह, गोदान आदि कृतियों का उल्लेख करते हुए इसकी प्रासंगिकता पर चर्चा छेड़ी। डॉ. आर्येंदु द्विवेदी ने गोरखपुर प्रवास के दौरान प्रेमचंद द्वारा की गई साहित्य सेवा पर अपनी बात रखी। इस दौरान डॉ. सभापति सिंह, नरेंद्र नारायण त्रिपाठी, जगदीश गुप्ता, शाश्वत, हिमांशु मोहन बरनवाल, विश्वनाथ शुक्ल, चंद्रमणि पांडेय, विजय शंकर आदि मौजूद रहे।