राधेश्याम धानुका की फाइल फोटो।
- फोटो : Rajesh Kumar
श्री राधाबाबा की अनन्य भक्ति और गीता वाटिका को समर्पित राधेश्याम धानुका भगत जी का मंगलवार को देहावसान हो गया। इस जानकारी से गीता वाटिका और गीता प्रेस में श्रद्धा रखने वाले तमाम लोग सदमे में आ गए। परिसर में पुष्पांजलि अर्पित करने वालों की कतार लगी रही, जबकि राप्ती के तट पर अंतिम संस्कार में भी तमाम लोग जुटे। मुखाग्नि उनके भतीजे विजय कुमार धानुका ने दी।
रतनगढ़, राजस्थान के भगत जी 1941 में श्री राधाबाबा के संपर्क में आए थे। उनकी श्रद्धा इतनी बढ़ती गई कि उन्होंने श्री राधा बाबा के महाप्रयाण के समय तक उनकी सेवा की। इसके बाद अपना पूरा जीवन बाबा की समाधि पर ही व्यतीत किया। पिछले कुछ दिनों से भगत जी की तबियत खराब थी। उनके देह त्याग खबर सुनते ही गीता वाटिका परिसर में लोगों की भीड़ जुटने लगी। दोपहर दो बजे उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। राप्ती तट पर पहुंचने तक रास्ते में कई जगह उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की गई।
भगत जी से मिलने गए थे भागवत
प्रसिद्घ समाजसेवी हनुमान प्रसाद पोद्दार भाईजी के 125वीं जयंती वर्ष पर दो अक्टूबर 2016 को गीतावाटिका के कार्यक्रम में आए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत ने राधेश्याम धानुका भगत जी से विशेष मुलाकात की थी। उनसे आशीर्वाद लेने के साथ-साथ श्री राधा बाबा के जीवन वृतांत पर भी चर्चा भी की थी।