सदर सांसद आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा एम्स के नाम जमीन न करने से निर्माण कार्य में देरी हो रही है। जुलाई 2016 में ही प्रधानमंत्री ने एम्स का शिलान्यास किया और तब से केंद्र सरकार निर्माण कार्य के लिए फंड जारी करना चाह रही है, मगर प्रदेश सरकार द्वारा अनावश्यक अड़ंगेबाजी लगाते हुए जमीन ही एम्स के नाम नहीं की जा रही।
उन्होंने प्रदेश के मुख्य सचिव राहुल भटनागर से भी इस संबंध में बात कर आपत्ति दर्ज कराई। कहा कि प्रदेश सरकार की यह कार्यवाही विकास कार्य में अवरोध पैदा करके पूर्वी उप्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा से वंचित करने का षड्यंत्र है। महंत ने बताया कि एक अक्टूबर को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा के गोरखपुर आगमन पर उन्होंने उनसे एम्स का निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने का आग्रह किया था। उन्होंने आश्वासन भी दिया। इसके बाद भी विलंब होने पर जब उन्होंने 13 नवंबर को नड्डा से फिर संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि अब तक गन्ना शोध संस्थान की भूमि का आवंटन एम्स के पक्ष में नहीं किया है जिस कारण निर्माण में देरी हो रही है।
इसके बाद महंत ने प्रदेश के मुख्य सचिव से इस संबंध में वार्ता की और इस बात पर नाराजगी व्यक्त की कि विकास की इतनी महत्वपूर्ण योजना में कैसे प्रदेश सरकार बाधा पैदा कर रही है। बकौल महंत मुख्य सचिव ने उन्हें आश्वस्त किया कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाईकी जाएगी।