मेडिकल कॉलेज के बर्न वार्ड में मरीज दो घंटे गर्मी से बेहाल रहे। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन के दावे की हकीकत भी सामने आ गई। कहने को तो वार्ड में जेनरेटर का कनेक्शन है मगर कुछ पंखे ही इससे चल रहे थे। बाकी के पंखे और एसी का कनेक्शन जेनरेटर से नहीं किया गया है।
वार्ड में बर्न मरीजों के लिए अलग से केबिन बनाई गई है। रविवार को 12 गंभीर मरीज इसमें भर्ती थे। सुबह साढ़े दस बजे अचानक लाइट चली गई। पहले तो मरीजों ने थोड़ी देर तक इंतजार किया फिर लाइट नहीं आई तो मरीजों के तीमारदारों ने इसकी शिकायत की। रविवार का दिन होने की वजह से उनके दर्द को सुनने वाला भी कोई नहीं था। वार्ड में भर्ती मरीजों को गर्मी से बेहाल देखकर तीमारदार भी खुद की व्यवस्था में ही भलाई समझे और मरीज बाहर से हाथ पंखे से मरीजों को राहत देने की कोशिश करते रहे। करीब दो घंटे तक मरीज गर्मी से बेहाल रहे। दोपहर साढ़े बारह बजे के करीब लाइट आने पर मरीजों को गर्मी से राहत मिली।
10 पंखों में ही जेनरेटर कनेक्शन
गोरखपुर। मई महीने में दो बार इस तरह की दिक्कत से मरीजों को रूबरू होना पड़ा था। तब मरीज के तीमारदारों ने जमकर हंगामा भी मचाया था। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने जेनरेटर कनेक्शन देने की बात कही और कनेक्शन दिया। बर्न वार्ड में कुल 42 पंखे और एसी लगे हुए है। इसमें से महज दस पंखों में ही जेनरेटर का कनेक्शन दिया गया है। एक भी एसी जेनरेटर से कनेक्ट नहीं है।