एटीएम में रकम न होने से लोग परेशान हैं।
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बड़े नोटों पर पाबंदी लगे 65 दिन बीत चुके हैं, लेकिन करेंसी की किल्लत अब तक पूरी तरह दूर नहीं हो पाई है। स्थिति यह है कि शहर के 265 एटीएम में से अब भी तीन-चौथाई से ज्यादा बंद ही चल रहे हैं। जो एटीएम खुले भी नजर आ रहे हैं, उनमें से ज्यादातर में करेंसी की किल्लत होने से लोगों को मायूस लौटना पड़ रहा है। रविवार को कुछ ज्यादा ही दिक्कत रही। बैंक खुले नहीं और एटीएम ने भी साथ नहीं दिया।
जिले में 1000 और 500 रुपये के नोट की शक्ल में बैंकों में अब तक करीब 57 सौ करोड़ रुपये जमा हुए हैं, लेकिन आरबीआई से करीब 19 सौ करोड़ रुपये ही मिले। इसका असर बैंकों के लेनदेन पर पड़ रहा है। यही वजह है कि सभी बैंक अपने खाताधारकों को सरकार द्वारा तय की गई 24 हजार रुपये की तय रकम नहीं दे पा रहे हैं। बैंक का सारा ध्यान काउंटर पर लाइन में लगे खाताधारकों के भुगतान पर है, यही वजह है कि बैंक एटीएम में बहुत कम करेंसी डाल रहे हैं। जिन बैंक शाखाओं में एटीएम लगा है वहां तो बैंक से करेंसी डलवा दी जा रही है, लेकिन अन्य एटीएम में अब नोट डालने में कोताही बरत जा रही है।
इसी के चलते अधिकांश एटीएम के या तो शटर गिरे हुए हैं या फिर वहां नो कैश का बोर्ड लगा रहता है। रविवार को शहर के एटीएम की पड़ताल में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा। बगहा बाबा मंदिर रोड, रुस्तमपुर, आजाद चौक, मोहद्दीपुर, इंदिरा बाल विहार, गुरुंग तिराहा, बेतियाहाता समेत शहर के कई इलाकों में एटीएम सूखे रहे। लीड बैंक मैनेजर आरके सिंह का भी यही कहना है कि अब तक एटीएम की स्थिति में बहुत सुधार नहीं हो सका है। रविवार को 40 से भी कम एटीएम काम कर रहे थे। आरबीआई से जरूरत भर की करेंसी मिले तो हालात सुधरे।