फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सपा नेता की बदौलत बढ़ी एआरटीओ की ताकत

Mon, 12 Jun 2017 02:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
गांव में बना काले कुबेर एआरटीओ राधेश्याम का घर। - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
गिरफ्तारी के बाद सुर्खियों में आए सस्पेंड एआरटीओ राधेश्याम यादव ने अलग-अलग शहरों के साथ ही गांव में भी अकूत संपत्ति बनाई है। हमेशा सत्ता के करीब रहे राधेश्याम ने अपनी रसूख की बदौलत नौकरी में कैडर बदलवा ली और जल निगम में जेई से संभागीय परिवहन विभाग में आरआई बन गए। गांव में 25 से 30 बीघा जमीन बैनामा कराने से लेकर आलीशान कोठी खड़ा करने वाले राधेश्याम को लेकर गांव में खूब चर्चाएं हैं।
विज्ञापन


सहजनवां के तिवरान गांव में जन्मे राधेयाम की प्रारंभिक शिक्षा डुमरी में हुई। 1977 में वैदिक धर्म इंटर कॉलेज से हाईस्कूल और 1979 में मुरारी इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट करने के बाद उन्होंने बस्ती से पॉलीटेक्निक किया। गांव के लोगों का कहना है कि पढ़ाई के बाद कई साल तक राधेश्याम बेरोजगार घूमते रहे। 1990-91 में जलनिगम में उनकी पहली तैनाती अवर अभियंता पद पर हुई। कई सालों तक नौकरी करने के दौरान राधेश्याम का संपर्क गोरखपुर के एक बड़े सपा नेता से हो गया। चर्चा है कि सपा नेता ने ही सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से लेकर कई मंत्रियों से राधेश्याम का परिचय कराया, जिसके बाद राधेश्याम की ताकत बढ़ती गई। उन्होंने अपनी पहुंच का फायदा उठाकर जलनिगम से आरटीओ में तैनाती करा ली। 

आरआई से एआरटीओ बने
आरआई बनने के बाद सत्ता में अपनी पहुंच का फायदा उठाकर जल्द ही राधेश्याम एआरटीओ बन गए। 19 साल तक चंदौली और वाराणसी में ही बने रहे। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ अकूत संपत्ति बनाई बल्कि विभाग में तबादले भी खूब कराए। 
विज्ञापन


किसान परिवार से हैं राधेश्याम
राधेश्याम यादव के पिता फौजदार यादव छोटे किसान थे। राधेश्याम चार बहन और एक भाई हैं। घर का खर्च खेती से ही चलता था। गांव के लोग बताते हैं कि पिछले 10-15 सालों से उनके घर की रंगत ही बदल गई। एआरटीओ के दो बेटे और दो बेटियां हैं। दोनों बेटियों की शादी उन्होंने खूब धूमधाम से की, जबकि बेटे पढ़ाई कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें