रंगाश्रम संस्था की ओर से अर्द्धनिर्मित प्रेक्षागृह को पूरा कराने की मांग लेकर जारी रंगाश्रम आंदोलन की 1256वीं कड़ी में शनिवार को ‘आरोप’ नाटक का मंचन हुआ। रंगाश्रम के अधूरे मंच पर हुए इस नाटक का निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी केसी सेन ने किया। नाटक के जरिए बताया गया कि कैसे हम आत्मकेंद्रित होकर बिना जाने-बूझे दूसरों पर आरोप लगाने लगते हैं। संवेदनशील कथानक को कलाकारों ने अपने अभिनय से जीवंत कर दिया।
नाटक की शुरुआत अस्पताल के दृश्य से होती है। एक शख्स का बेटा पेड़ से गिर जाता है तो वह उसे लेकर अस्पताल आता है। मौके पर डॉक्टर को न पाकर वह भड़क जाता है। मरीज की हालत देखकर कंपाउंडर डॉक्टर को फोन करता है। कुछ देर में डॉक्टर आते हैं और मरीज को देखने में जुट जाते हैं। इलाज के बाद चिकित्सक जाने लगते हैं तब भी भड़का तीमारदार लापरवाही और कामचोरी का आरोप लगाते हुए उन्हें कोसता है। डॉक्टर बिना प्रतिक्रिया दिए चले जाते हैं, मगर तीमारदार का गुस्सा कम नहीं होता।
इस पर कंपाउंडर झल्ला उठता है और तीमारदार को फटकारते हुए बताता है कि कर्तव्यनिष्ठ डॉक्टर पर अनर्गल आरोप लगाने से पहले आपको उनके बारे में जानना चाहिए। कल एक्सीडेंट में उनके बेटे की मौत हो गई। जिस वक्त आप आए थे तब वह घाट पर थे। जानकारी दी तो वह इस परिस्थिति में भी आपके बेटे को बचाने के लिए अस्पताल पहुंचे।
सच्चाई जानकर तीमारदार को अपने किए पर पछतावा होता है और वह दौड़कर डॉक्टर के पास पहुंचता है। अपने किए पर शर्मिंदा होते हुए उनसे माफी मांगता है। मंच पर विवेक शुक्ल, अमित, आदर्श, राकेश यादव, मनोज आदि ने पात्रों को सजीव कर दिया।