मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंची एक महिला ने सीएम से कहा, उसे उसके तीन बच्चों का पिता वापस चाहिए, जिसकी उपेक्षा के कारण वह दर-दर की ठोकरें खा रही है। उसकी शादी परिवार वालों की मर्जी से हुई थी, लेकिन फिर भी पति उसे छोड़कर भाग गया। उसने उसे खोज तो लिया है पर वह भागता फिर रहा है।
लगभग 30 साल की एक महिला एक छोटे से बच्चे को गोद में लिए मुख्यमंत्री से मिलने के लिए चिलचिलाती धूप में कतार में खड़ी थी। उसका मासूम गोद में धूप के कारण सिसक रहा था। पूछने पर वह फफक पड़ी। उसने अपना नाम सरिता बताया और कहा कि उसका पति पुलिस में है। उसका नाम धर्मवीर है। उसकी ससुराल तारामंडल में है। नवंबर महीने से उसका विवाद चल रहा है। सास-ससुर ने उसे पति से अलग कर दिया। वह बहुत मुश्किल से जीवन यापन कर रही है। उसने कहा कि वह खाना पुलिस लाइन की मेस में खाती है पर सोती स्टेशन पर है। जब उसने पता किया तो जानकारी मिली कि उसका पति बस्ती पुलिस लाइन में तैनात है, मगर वहां पहुंची तो वह मिला ही नहीं। बकौल सरिता, उसने बस्ती के एसपी से भी मिलकर न्याय मांगा, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसीलिए वह मुख्यमंत्री के दरबार में आई है। सीएम ने भरोसा दिया है कि उसके साथ न्याय होगा।
योगी से मिलने मंदिर पहुंची एवरेस्ट विजेता संतोष,
मुख्यमंत्री के जनता दरबार में शुक्रवार को हजारों की भीड़ अपनी फरियाद लेकर पहुंची थी। उसी भीड़ में एक महिला दो बच्चों के साथ मंदिर में प्रवेश की। सुरक्षा कर्मियों को बताया कि वह एवरेस्ट विजेता संतोष यादव है। वह योगी से मिलने के लिए आई है। कार्यालय में बैठे सीएम के पास पहुंची अपना परिचय दिया तो उन्होंने उनका हाल पूछा। आने का कारण पूछा तो बताया कि बच्चे के जन्म दिन पर किसी धार्मिक स्थान पर जाती हूं। इस लिए यहां पर आई।
हरियाणा भिवाड़ी की रहने वाली संतोष यादव एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला मानी जाती हैं। उन्होंने दो बार एवरेस्ट को फतह किया है। पहली बार 12 मई 1992 को 11 बजकर 23 मिनट पर दिन में एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया। दूसरी बार ठीक एक साल बाद 1993 को एवरेस्ट फतह किया। दुनिया की सबसे ऊंचे शिखर पर चढ़ने वाली महिला पूरी तरह से धार्मिक प्रवृत्ति की हैं। उनकी शादी बिहार के मुंगेर निवासी उत्तम कुमार से हुई है। कुमार पेशे से व्यवसायी हैं और वह दिल्ली में रहते हैं। वह अपने बच्चे के जन्मदिन पर हर साल किसी न किसी धार्मिक स्थान पर जाते हैं। इस साल वह लोग गोरखनाथ बाबा का दर्शन करने के इरादे से यहां पर आए। उन्हें पता चला कि योगी जी आए हैं तो रुक गए। सुबह उनसे मिले और उनका आशीर्वाद लिया। उनसे मिल कर बहुत खुशी हुई। संतोष यादव कहती है कि हमारे देश की संस्कृति वैज्ञानिक है। चाहे हमारा रहन सहन हो , नाते रिश्ते हो , संबंध हो सब वैज्ञानिक हैं। हमारे देश की जैसी संस्कृति दुनिया में कही नहीं है। हमारी शरीर पंच तत्वों से बनी है। बहन भाई मंगल बुध ग्रह की तरह हैं तो मां चंद्रमा की तरह होती है। इस लिए मां को अपनी तथा बच्चों को अपनी ड्यूटी ठीक से करनी चाहिए।
पति की फरियाद लेकर मंदिर पहुंची पत्नी
बलिया के बासडीह नगर पंचायत अध्यक्ष की पत्नी शीला सिंह शुक्रवार को मंदिर में अपनी सास के साथ मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से मिलने पहुंचीं। उन्हें प्रार्थना पत्र देकर कहा कि उनके पति और देवर को पुलिस सपा सरकार में मंत्री रहे एवं वर्तमान विधायक के दबाव में हत्या के फर्जी मुकदमे में फंसा रही है। बकौल शीला सिंह, उनके पति बांसडीह नगर पंचायत अध्यक्ष हैं, जबकि उनके देवर ब्लाक प्रमुख। विधानसभा चुनाव में पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक का उनके परिवार ने साथ नहीं दिया था, इस नाते वह खुन्नस खाए हैं। उनका आरोप है कि इसी कारण एक व्यापारी की हत्या में उनके पति, देवर और रिश्तेदार को आरोपी बना दिया गया है। वहां के कोतवाल सपा विधायक के इशारे पर उनके परिवार और रिश्तेदार को परेशान कर रहे हैं।
गाजियाबाद से शबील बानो भी पहुंची गुहार लेकर
महराजगंज के पनियरा के रामपुर रानी टोला निवासी शबील बानो भी मुख्यमंत्री के दरबार में न्याय की गुहार लेकर पहुंचीं। उन्होंने प्रार्थना पत्र देकर पति से इंसाफ दिलाने की मांग की। उन्होंने बताया कि उसके पति ने उसका अपहरण करा दिया। उसे बेहोशी की हालत में गाजियाबाद फेंक दिया गया था, मगर एक व्यक्ति की इंसानियत के कारण वह जिंदा बच गई। वह गाजियाबाद में रहकर एक कंपनी में सिलाई का काम करती है। न्याय की उम्मीद में वह गोरखपुर आई है।
बकौल शबील बानो, शादी के कुछ समय बाद ही उसके पति का निधन हो गया। ऐसे में माता-पिता ने उसकी शादी नंदोई से करा दी क्योंकि मेरी ननद का भी निधन हो चुका था। जिससे मेरी शादी हुई उसने मेरी 70 डिस्मिल जमीन बेच कर सारी रकम ले ली। जब वह चार माह की गर्भवती थी तो उसने मेरा अपहरण करा दिया। बेहोशी की हालत में वह गाजियाबाद में मिली। पहले पति का बच्चा विकलांग है, जबकि दूसरे का चार साल का है। वह बड़ी मुश्किल से अपना गुजारा कर रही है। उसे उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के दरबार से उसे न्याय मिलेगा।