भजन माहौल को भक्तिमय बना रहे थे तो गजलों पर प्रेम सहेजने की जिम्मेदारी थी, मगर दोनों का साथ-साथ निर्वाह बखूबी हो रहा था। निर्वाह करने की जिम्मेदारी अनूप जलोटा जैसे दिग्गज भजन व गज़ल गायक पर जो थी। भजन और गज़ल की जुगलबंदी से गोरखपुर महोत्सव के पहले दिन की शाम को उन्होंने सुरमयी बना दिया।
शाम ढलते ही अनूप जलोटा महोत्सव के मंच पर थे और सामने थे सुर और संगीत के कद्रदान। अब तक सीडी से सुनाई देने वाले मशहूर भजन ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन... को सुनने के लिए लोग बेताब थे। अनूप ने भी उनकी ख्वाहिश को महसूस किया और कार्यक्रम की शुरुआत उसी भजन से की। लगा जैसे कि अब भजनों का सिलसिला शुरू होगा लेकिन पहले भजन के बाद जब उन्होंने अपने मशहूर गज़ल चांद अंगड़ाइयां ले रहा है... की पेशगी की तो लोग आचरज में पड़ गए, लेकिन यह अचरज देर तक कायम नहीं रहा, क्योंकि यह सिलसिला जारी रहा। मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो..., तुम्हारे शहर का मौसम..., लागा चुनरी में दाग.., जग में सुंदर हैं दो नाम जैसे गज़ल और भजन की जुगलबंदी का दौर करीब दो घंटे तक चला।
इस बीच गज़ल गायक जगजीत सिंह को उनके मशहूर गज़ल होठों से छू लो तुम... से जब अनूप जलोटा ने श्रद्धांजलि दी तो माहौल में कुछ इस तरह संजीदगी दिखी कि सभी इस श्रद्धांजलि में उनके साथ हैं। अनूप ने माहौल का रुख फिर बदला और अपने पसंदीदा भजन कभी-कभी भगवान को भक्तों से काम पड़े.... पर सुर छेड़ दिया तो फिर से जलोटामय हो गया माहौल। राम नाम के पुकार में सभी ने स्वर में स्वर मिलाकर उनका साथ दिया। गोविंद नाम लेकर तन से प्राण निकले.... भजन सुनाकर उन्होंने सुरमयी शाम का समापन किया।