भोजपुरी लोकगीतों से लोगों के दिलों में पैठ बना चुकीं मशहूर असमिया गायिका कल्पना शुक्रवार को गोरखपुर महोत्सव के मंच पर थीं। अनूप जलोटा के भजन और गज़ल से मुग्ध हो चुके श्रोताओं को कल्पना के भोजपुरी गीतों के धमाल का इंतजार था। आधे घंटे के अंतराल के बाद जब वे सूफी अंदाज में मंच पर उतरीं तो लोगों ने इसी उम्मीद के साथ उनका स्वागत भी किया।
गणेश और शिव वंदना से उन्होंने अपने प्रस्तुति की शुरुआत की। वंदना का दौर लंबा खिंचा तो लोगों का रुख भांप उन्होंने बाबा गोरक्षनाथ की वंदना कर उनसे सीधे जुड़ने का प्रयास किया। लोग धैर्य से उनके भोजपुरी गीतों का इंतजार कर रहे थे लेकिन उनका भजन प्रस्तुति का सिलसिला जारी रहा। इस क्रम में वे अपने गुरु भारतरत्न भूपेन हजारिका को श्रद्धांजलि देना नहीं भूलीं और उनके मशहूर गीत गंगा तुम बहती हो क्यों... को भी सुनाया। लेकिन दर्शकों को तो उनके अंदाज के भोजपुरी गीतों का इंतजार था, सो वे उन्हीं गीतों की डिमांड करने लगे।
थोड़ी देर के लिए वो असहज हुईं तो एक जूनियर गायक पर मंच छोड़ दिया। हालांकि उस गायक ने फेंक देहली थरिया... और दरोगा जी चार दिन से पियवा... सुनाकर लोगों को लुभाने की कोशिश की लेकिन दर्शकों को कल्पना की आवाज चाहिए थी, वो भी उनके अंदाज में। माहौल भांप कल्पना फिर से मंच पर आईं और फिल्मी गीतों की पॉप पेशगी से लोगों को बांधने की कोशिश की।
इस बीच कल्पना के भोजपुरी गीतों की डिमांड चलती रही, लेकिन कार्यक्रम के अंत तक दर्शकों को उनके वे गीत नहीं सुनने को मिले, जिनका उन्हें इंतजार था। इस दौरान मंच संचालन की जिम्मेदारी आकाशवाणी उद्घोषक नवीन पांडेय और मिनीषा माहेश्वरी ने निभाई।