कुत्ता, बंदर या बिल्ली काटने के बाद सरकारी अस्पताल पर भरोसा न करें तो ही ठीक है, क्योंकि सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज वैक्सीन खत्म हो चुकी है। बड़ी बात यह कि आरसी (रेट कांट्रैक्ट) से भी दवा बाहर कर दी गई हैं। जिस वजह से अफसर चाहकर भी दवा की खरीद नहीं कर पा रहे हैं। वहीं जिला अस्पताल में पुराने ऑर्डर पर आई वैक्सीन के भरोसे काम चल रहा है। स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन न लग पाने पर मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 50 से 100 लोग एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के मरीज ज्यादा होते हैं। जिला अस्पताल में भी एक हफ्ते तक वैक्सीन न होने से परेशानी हो रही थी, मगर पुराने ऑर्डर पर वैक्सीन आने के बाद मरीजों को यहां वैक्सीन लगाई जा रही है। लेकिन सीएचसी व पीएचसी पर एंटी रैबीज वैक्सीन का टोटा बना हुआ है। आलम यह है कुत्ते के काटने के बाद मरीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं तो उन्हें जिला अस्पताल रेफर करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बच रहा है। यही वजह है कि जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। एक स्वास्थ्य अफसर की मानें तो आरसी से बाहर होने की वजह से वैक्सीन नहीं मंगा पा रहे हैं। हालांकि अफसर खुलकर आरसी के मसले पर बोलने को तैयार नहीं है।
वैक्सीन खत्म होने से दिक्कत बढ़ी है। डिमांड भेजी गई है। जिला अस्पताल से भी वैक्सीन मांगी गई है, ताकि स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजी जा सके। जल्द ही वैक्सीन आ जाए, इसकी कोशिश की जा रही है।
- डॉ. रवींद्र कुमार, सीएमओ