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यूपी: पुरस्कार पाकर खिले 715 मेधावियों के चेहरे, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के हाथों मिला सम्मान

Tue, 10 Dec 2019 07:13 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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पुरस्कार पाकर होनहारों के चेहरे खुशी से खिल उठे। - फोटो : अमर उजाला
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महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद संस्थापक सप्ताह का समापन मंगलवार को मेधावियों में पुरस्कार वितरण के साथ हो गया। समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों पुरस्कार पाकर होनहारों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
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गोखनाथ मंदिर के दिग्विजयनाथ सभागार में आयोजित कार्यक्रम में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के चार दर्जन संस्थानों के 715 मेधावी सम्मानित किए गए। पुरस्कार वितरण की शुरूआत स्वर्ण पदकों से हुई। सबसे पहले श्रेष्ठतम संस्था को स्वर्ण पदक गुरु श्री गोरक्षनाथ विद्यापीठ, भरोहिया पीपीगंज को मिला। यह पदक वहां के प्रधानाचार्य मनीष कुमार दूबे ने प्राप्त किया।

श्रेष्ठतम शिक्षक का योगीराज बाबा गंभीर नाथ स्वर्ण पदक महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के शिक्षक मनोज प्रताप चंद को दिया गया। स्नातकोत्तर कक्षाओं में श्रेष्ठतम विद्यार्थी का ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ स्वर्ण पदक दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज के एमकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा अंकिता त्रिपाठी को दिया गया।
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स्नातक कक्षाओं में श्रेष्ठतक विद्यार्थी का ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ स्वर्ण पदक दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज सिविल लाइंस के बीए प्रथम वर्ष के छात्र दुर्गेश कुमार को दिया गया। वहीं माध्यमिक वर्ग में श्रेष्ठतम विद्यार्थी का महाराणा प्रताप स्वर्ण पदक महाराणा प्रताप सीनियर सेकेंड्री स्कूल मंगला देवी मंदिर बेतियाहाता के कक्षा 12 के छात्र शुभम सिन्हा को दिया गया।

स्वर्ण पदक विजेताओं के सम्मान में पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके साथ ही राज्यपाल एवं सीएम ने अन्य 710 मेधावियों को अपने हाथों से स्मृति चिह्न एवं प्रमाण पत्र दिया। पुरस्कार वितरण का कार्यक्र्रम एक घंटे से ज्यादा चला।

जीवन में अनुशासन बहुत जरूरी: राज्यपाल

समारोह को संबोधित करतीं राज्यपाल आनंदी बेन पटेल - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। लड़कियों भोजन पर ध्यान नहीं देती हैं। जबकि बढ़ती उम्र में पौष्टिक आहार सबसे ज्यादा जरूरी है। सभी स्कूल और कॉलेजों में शिविर लगाकर खून की जांच कराएं। हीमोग्लोबिन जरूर चेक हो।

राज्यपाल ने कहा कि जीवन में अनुशासन बहुत जरूरी है। बच्चों में अनुशासन की आदत डालें तो बड़े होने पर उनके जीवन का मूलमंत्र बन जाएगा। हर महापुरुष ने अपने जीवन में अनुशासन को महत्व दिया और उपलब्धि के चरम पर पहुंचे। विश्व में आज कड़ी प्रतिस्पर्धा है। अपने आपको ऐसा तैयार करें कि दुनिया में किसी भी छात्र से आंख में आंख मिलाकर बात कर सकें। लेकिन यह याद रखें कि प्रतिस्पर्धा सकारात्मक होनी चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा विकास की कुंजी होती है। भारत के विकास का अर्थ है, शिक्षा का विकास। शिक्षा ही अच्छे व्यक्ति और समाज के निर्माण की आधारशिला होती है। सही मायने में उसी समाज और व्यक्ति को शिक्षित माना जा सकता है, जहां प्रेम ,करुणा और सद्भाव जैसे मूल्यों को सर्वाधिक महत्व दिया जाता है। शिक्षा का प्राथमिक एवं व्यापक उद्देश्य ही लोक कल्याण है।

शिक्षक समाज में मार्गदर्शक के रूप में अपने महत्व को पहचाने और योग्य नागरिक के निर्माण की अनवरत साधना का मार्ग प्रशस्त करें।  इसी दृष्टि से महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् की भूमिका स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व ही महंत दिग्विजयनाथ ने बहुत योजनाबद्ध ढंग से रखी। जो गोरक्षपीठाधीश्वर के मार्गदर्शन में निरंतर सही दिशा में प्रगति की तरफ अग्रसर है। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि महान विभूतियों के नाम से आज पदक प्राप्त करने वाले सभी युवा देश के भविष्य के लिए अपना सार्थक योगदान देंगे।
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महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला
समारोह को संबोधित करते हुए गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सभी विद्यार्थी आगे बढ़ सकते हैं । बस उन्हें परिश्रम करना होगा। परिश्रम का कोई मूल्य नहीं होता है परिश्रम विद्यार्थियों को अमूल्य बना देता है और मेहनत यशश्वी बना देगा।

1932 में पूर्वी यूपी में शैक्षिक पुनर्जागरण के लिए महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना महंत दिग्विजय नाथ ने की। जब भी कोई स्वाभिमानी समाज अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए तैयार होता है तो कोई ताकत उसपर शासन नही कर सकती। आज़ादी मिलना पर्याप्त नही है बल्कि आज़ादी के मायनों को जानकर समर्थ और शक्तिशाली भारत का निर्माण करने के लिए महंत दिग्विजय नाथ ने सोचा था। इसी सोच को लेकर महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद ने ही देश में पहले महिलाओं के लिए निजी क्षेत्र का संस्थान खोला था।

महंत दिग्विजय नाथ और महंत अवेद्यनाथ के बाद आज भी यह कार्य निरन्तर चल रहा है। इस्के पीछे का उद्देश्य भारतीयता से परिपूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा का विस्तार और जहां शासन ना पहुच पाया हो, वहां अपनी परिषद के माध्यम से लोगों तक पहुचना है। पिछले 25 साल में कौन संस्था प्रगति कर रही है और कौन अवनति पर है वो इन संस्थाओं की रिपोर्ट बताती है।

किसी भी क्षेत्र में कार्य करने वाला व्यक्ति हो उसके साथ यह बात जुड़ी होती हैं। 2032 में जब शिक्षा परिषद अपना शताब्दी वर्ष माना रहा होगा उस समय इस परिषद ने कौन की उपलब्धि हासिल की होगी और कौन लीक से हटकर लक्ष्य प्राप्त करेगा ये आप सबके लिए चुनौती है। परिश्रम का कोई विकल्प और मूल्य नही हो सकता।
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