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तर्क और प्रभावी प्रस्तुति से एमपीपीजी कॉलेज की टीम बनी विजेता

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दिग्विजय नाथ एलटी कॉलेज की मानसी सिंह और नितेश पांडेय ने दूसरा स्‍थान प्राप्त किया ।
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तर्क और प्रभावी प्रस्तुति से एमपीपीजी कॉलेज की टीम बनी विजेता
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गोरखपुर। श्री मुरारीलाल माहेश्वरी स्मृति राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता ‘विचार-प्रवाह’ के तहत जिला स्तर पर आयोजित मुकाबले में एमपीपीजी कॉलेज की टीम ने बाजी मारी। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपने तर्क आधारित वैचारिक मतों से खूब प्रभावित किया। ‘एक देश एक चुनाव’ विषय वाद-विवाद में पक्ष और विपक्ष ने बेहतर तालमेल से न सिर्फ अपनी बातों को सही साबित करने की कोशिश की बल्कि तथ्य और तर्कों की काबिलियत के बलबूते पुरस्कार के हकदार भी बने।
विजेता टीम एमपीपीजी कॉलेज जंगलधूसड़ के सत्यप्रकाश तिवारी और प्रकाश पांडेय ने अपने तर्कों से सभी को प्रभावित कर पहला पुरस्कार जीता। दिग्विजय नाथ एलटी कॉलेज की मानसी सिंह और नितेश पांडेय की टीम दूसरे, मारवाड़ बिजनेस स्कूल की आकांक्षा श्रीवास्तव व पहल गुप्ता की टीम तीसरे स्थान पर रही। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के जय कुमार और दिव्यांशी श्रीवास्तव तथा दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कमलेश यादव और अरुण मिश्रा को सांत्वना पुरस्कार मिला। मुख्य अतिथि एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. एसएन सिंह एवं कार्यक्रम अध्यक्ष एमजीपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने विजेता टीमों को प्रशस्ति पत्र और नकद राशि देकर सम्मानित किया।
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कार्यक्रम में कुलपति ने कहा कि सफलता की कुंजी असफलताओं से ही मिलती है। हार-जीत पर ध्यान न दे बल्कि कमियों को चिह्नित करें और भविष्य में बेहतर करने की कोशिश करें। उन्होंने हारे हुए प्रतिभागियों को निराश न होकर और बेहतर करने की सलाह दी। ऐसे आयोजन कराकर विद्यार्थियों को एक बेहतर मंच उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने अमर उजाला की पहल को सराहा। निर्णायक मंडल में गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा और प्रो. शिखा सिंह रहे। प्रो. हर्ष ने बताया कि विजेता का चयन तथ्यों की प्रस्तुति, प्रदर्शन, श्रोताओं को प्रभावी ढंग से अपनी बात समझाने आदि बिंदुओं के आधार पर किया गया।
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आठ कॉलेजों की नौ टीमों ने किया प्रतिभाग
महात्मा गांधी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज के सभागार में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में शहर के आठ कॉलेजों की नौ टीमों ने भाग लिया। गोरखपुर विश्वविद्यालय, चंद्रकांति देवी रमावती देवी आर्य महिला पीजी कॉलेज, सेंट एंड्रयूज कॉलेज, गंगोत्री देवी महिला पीजी कॉलेज, एमपीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़, दिग्विजयनाथ एलटी कॉलेज, मारवाड़ बिजनेस स्कूल की एक-एक तथा एमएमएमयूटी की दो टीमों ने हिस्सा लिया।
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विजेताओं के पक्ष व विपक्ष के तर्क
विजेता टीम के प्रकाश पांडेय ने एक देश एक चुनाव का पक्ष लेते हुए तर्क दिए कि बार-बार चुनाव होने के कारण अधिकतर लोग मतदान में रुचि नहीं लेते। यदि पांच साल में एक बार चुनाव होगा तो सभी उत्साह से भाग लेंगे जिससे मतदान प्रतिशत बढ़ेगा। 2019 में हुए चुनाव में 64,000 करोड़ रुपये खर्च हुए, देश के सभी चुनाव इस एक खर्च में ही हो जाते तो बाकी बची राशि से पूरे देश में एम्स जैसे अस्पताल खोले जा सकते हैं। विपक्ष में सत्य प्रकाश का तर्क था कि लोकतंत्र में हर एक मतदाता की सहभागिता होनी जरूरी है। एक देश एक चुनाव के लिए हम कितने तैयार हैं इस पर विचार करना होगा। राज्यों में मध्यावधि चुनाव की स्थिति से कैसे निपटेंगे? राष्ट्रीय मुद्दे प्रादेशिक मुद्दों पर हावी हो जाएंगे और स्थानीय दलों की भूमिका नगण्य हो जाएगी।
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दूसरे स्थान पर रही दिग्विजय नाथ एलटी कॉलेज की टीम की मानसी सिंह का तर्क था कि एक देश एक चुनाव से जाति-धर्म, क्षेत्रीय दलों और विपक्ष को खतरा नहीं है, इसके लिए सृजनात्मक अविश्वास प्रस्ताव का प्रावधान किया जाए। इसका अर्थ है कि कोई पार्टी तब तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं ला सकती जब तक वह खुद सदन में बहुमत साबित करने योग्य नहीं हो जाती। विपक्ष में नितेश पांडेय का तर्क था कि केंद्र या राज्य सरकार पांच साल के लिए चुनी जाती हैं। एक देश एक चुनाव के लिए राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल घटाना या बढ़ाना पड़ेगा, ऐसा संशोधन करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ होगा, राज्यों की स्वायतत्ता पर भी प्रहार होगा।
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