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सैलून चलाने वाली बहनों का सचिन तेंदुलकर ने किया सम्मान, ‘अमर उजाला’ भी कर चुका है सम्मानित

Sun, 05 May 2019 05:44 PM IST
राजेश सैनी अमर उजाला ब्यूरो, कुशीनगर
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बेटियों को सम्मान
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क्रिकेट के ‘भगवान’ कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के नाम कई रिकॉर्ड हैं लेकिन इस फेहरिस्त में एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। यह है दो सगी बहनों से पहली बार दाढ़ी बनवाने का। उन्होंने अपनी दाढ़ी यूपी के कुशीनगर की कसया तहसील के बनवारी तोला गांव की नेहा और ज्योति से बनवाई। उन्होंने यह काम देश में लिंग संबंधित रूढ़िवादिता को तोड़ने के मकसद से किया। 

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सचिन ने पहली बार किसी महिला से अपनी दाढ़ी बनवाने की तस्वीर भी इंस्टाग्राम पर पोस्ट की। अपने इस सुखद अनुभव को बयां करते हुए उन्होंने लिखा कि आप लोग शायद इसे नहीं जानते, लेकिन मैंने कभी भी किसी से अपनी दाढ़ी नहीं बनवाई। आज यह रिकॉर्ड भी टूट गया। इन दो बहनों से मिलना सम्मान की बात है। सचिन ने इन दोनों को जिलेट स्कॉलरशिप भी प्रदान की, जिससे उनकी शैक्षिक और पेशेवर जरूरतों को पूरा किया जाएगा। 

देश खासकर यूपी के कस्बों में अब भी इस पेशे में पुरुषों का ही वर्चस्व माना जाता है। ऐसे में इन दोनों बहनों का सफर आसान नहीं था क्योंकि लोग शुरू में लड़की होने के चलते उनसे दाढ़ी बनवाने या बाल कटवाने से परहेज करते थे। इतना ही नहीं, कुछ लोग दोनों को ताने भी देते थे लेकिन लोगों की परवाह किए बिना दोनों अपने काम में लगी रहीं और आज मिथक तोड़कर एक नई मिसाल बन गई हैं। 
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जिलेट के विज्ञापन से सुर्खियों में, यूट्यूब पर 1.60 करोड़ ने देखा
जिलेट इंडिया के विज्ञापन में इन दोनों बहनों की प्रेरणास्पद कहानी को दिखाया। इस विज्ञापन को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। इस विज्ञापन को यूट्यब पर करीब 1.60 करोड़ लोगों ने देखा है। इसके बाद ही सचिन ने इन दोनों बहनों से दाढ़ी बनवाने का फैसला किया था। 

पिता की बीमारी से शुरू हुआ दोनों बहनों का संघर्ष का दौर
नेहा और ज्योति के पिता ध्रुव नारायण शर्मा गुमटी में सैलून चलाते थे। सात बेटियों में से चार की शादी हो चुकी है। ज्योति छोटी उम्र से ही पिता के काम में हाथ बंटाती थी लेकिन तीन साल पहले ध्रुव नारायण के शरीर के बाएं हिस्से में लकवा मार गया जिससे वह काम करने के लायक नहीं रहे। इसके बाद ज्योति ने इंटर करने के बाद पढ़ाई छोड़कर घर का खर्च चलाने के लिए पिता का सैलून संभाल लिया। इस काम में 11वीं में पढ़ने वाली उसकी छोटी बहन नेहा भी मदद करने लगी। इन दोनों बहनों के संघर्ष को कुछ दिन पहले ‘अमर उजाला’ ने भी सम्मानित किया था।

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