अजय ने फहराया विजय का झंडा
टीपी शाही
गोरखपुर। जिला पंचायत की सबसे प्रतिष्ठापरक लड़ाई में वार्ड न. 39 के अजय ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पटखनी देते हुए विजय का झंडा फहरा दिया। यहां पर सियासत के दो धुरंधरों की प्रतिष्ठा दांव पर थी। एक तरफ सपा सरकार के पूर्व मंत्री की बेटी मैदान में थी तो दूसरी तरफ भाजपा विधायक के भाई उन्हें चुनौती दे रहे थे। जीत के लिए हर हथकंडे अपनाए गए थे। कई बार दोनों के बीच टकराव हुआ। चुनाव के दो दिन पूर्व स्थिति तब विस्फोटक हो गई जब समर्थकों में जमकर मारपीट हो गई।
यूं तो जिला पंचायत के 73 वार्डों में से 11 सौ से अधिक प्रत्याशियों ने अपनी दावेदारी की थी। हर वार्ड महत्वपूर्ण है पर वार्ड न. 39 जिले के लिए विशेष हो गया था। यहां पर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के विधायक विजय बहादुर यादव के ब्लॉक प्रमुख भाई अजय बहादुर यादव और पूर्व मंत्री जयप्रकाश की बेटी एवं खलीलाबाद के पूर्व सांसद की बहू के उतरने से इस वार्ड पर सबकी नजर थी। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आता गया इस वार्ड में हलचल बढ़ती गई। दोनों पक्षों के सपा के बैनर पर चुनाव लड़ने के कारण सपा में भी खेमेबंदी हो गई थी। हालांकि पार्टी ने किसी को अपना उम्मीदवार नहीं घोषित किया था फिर भी दोनो के पक्ष में सपा के कई दिग्गज खड़े थे। इससे चुनाव प्रचार भी यहां का ऐतिहासिक हो गया था। लग्जरी गाड़ियों का काफिला गांव की पगडंडियों पर घूम रहा था। एक काफिला गया तो दूसरा लोगों के घरों पर पहुंच जाता था। मतदान के बाद जीत का दावा हर कोई कर रहा था। विधायक विजय बहादुर ने दावा किया था कि उनके मुकाबले में कोई नहीं है। जो उनके साथ रेस में शामिल हुआ वह इतना पीछे है कि उसे मुकाबले में मान ही नहीं सकते। आज परिणाम आया तो उनकी बात सच निकली।
वार्ड न. 39 का चुनाव जिला पंचायत का सेमीफाइनल माना जा रहा था। यहां से जीतने वाले का टारगेट अध्यक्ष की कुर्सी है। विधायक विजय बहादुर के भाई अजय बहादुर यादव क्षेत्र पंचायत के अध्यक्ष हैं। वह जिला पंचायत का अध्यक्ष बनने के लिए सदस्य का चुनाव लड़े। आगे क्या होगा आने वाला समय बताएगा।
इसी तरह से जिले का वार्ड न.61 उस समय सुर्खियों में आ गया जब एक कारोबारी विनय वर्मा ने यहां से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। सैकड़ों गाड़ियों के साथ जब उनका काफिला क्षेत्र में घूमा तो हर किसी की नजर उन पर पड़ी। उस दिन से वह चर्चा के केंद्र बन गए। नामांकन के बाद से धुआंधार प्रचार के अलावा नई चुनावी योजना के तहत मतदाता कैसे खुश होगा उसका उपाय किया जाने लगा। इसका असर हुआ और वर्मा कड़े मुकाबले में ही सही पर चुनाव जीत गए।